तद्दर्शितं त्वयात्मनः कौलीन्यम् ।
अथ वा साधु चेदमुच्यते-एतद्-अर्थं कुलीनानां नृपाः कुर्वन्ति सङ्ग्रहम् ।
आदि-मध्यावसानेषु न ते गच्छन्ति विक्रियाम् ॥
तद्दर्शितं त्वयात्मनः कौलीन्यम् ।
अथ वा साधु चेदमुच्यते-एतद्-अर्थं कुलीनानां नृपाः कुर्वन्ति सङ्ग्रहम् ।
आदि-मध्यावसानेषु न ते गच्छन्ति विक्रियाम् ॥
अथ वा साधु चेदमुच्यते-एतद्-अर्थं कुलीनानां नृपाः कुर्वन्ति सङ्ग्रहम् ।
आदि-मध्यावसानेषु न ते गच्छन्ति विक्रियाम् ॥
अन्वयः
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नृपाः एतत्-अर्थं कुलीनानां सङ्ग्रहं कुर्वन्ति ते आदि-मध्य-अवसानेषु विक्रियां न गच्छन्ति।
Summary
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Kings gather well-born people for this very reason: they do not undergo any change in character at the beginning, middle, or end of a situation.
सारांश
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कुलीन व्यक्ति कठिन परिस्थितियों में भी अपना स्वभाव नहीं बदलते। राजा इसीलिए कुलीन लोगों को अपने पास रखते हैं क्योंकि वे हर स्थिति में अडिग रहते हैं।
पदच्छेदः
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| तत् | तद् (१.१) | that |
| दर्शितम् | दर्शित (√दृश्+णिच्+क्त, १.१) | shown |
| त्वया | युष्मद् (३.१) | by you |
| आत्मनः | आत्मन् (६.१) | of oneself |
| कौलीन्यम् | कौलीन्य (२.१) | nobility |
| अथ | अथ | now |
| वा | वा | or |
| साधु | साधु | well |
| च | च | and |
| इदम् | इदम् (१.१) | this |
| उच्यते | उच्यते (√वच् भावकर्मणोः लट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | is said |
| एतत् | एतद् | this |
| अर्थम् | अर्थ (२.१) | for the sake of |
| कुलीनानाम् | कुलीन (६.३) | of noble persons |
| नृपाः | नृप (१.३) | kings |
| कुर्वन्ति | कुर्वन्ति (√कृ कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.) | do |
| सङ्ग्रहम् | सङ्ग्रह (२.१) | patronage |
| आदि | आदि | beginning |
| मध्य | मध्य | middle |
| अवसानेषु | अवसान (७.३) | end |
| न | न | not |
| ते | तद् (१.३) | they |
| गच्छन्ति | गच्छन्ति (√गम् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.) | go |
| विक्रियाम् | विक्रिया (२.१) | change |
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