अन्वयः
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यस्य भृत्यस्य पश्यतः प्राणेषु विद्यमानेषु स्वामी आपदं प्राप्नुयात् सः भृत्यः नरकं व्रजेत्।
Summary
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A servant who allows his master to fall into calamity while he himself is alive and watching will surely go to hell.
सारांश
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जिस स्वामी का सेवक उसके जीवित रहते विपत्ति में पड़ जाए, वह सेवक नरक का भागी बनता है।
पदच्छेदः
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| आपदम् | आपद् (२.१) | calamity |
| प्राप्नुयात् | प्राप्नुयात् (प्र√आप् कर्तरि विधिलिङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | would obtain |
| स्वामी | स्वामिन् (१.१) | the master |
| यस्य | यद् (६.१) | whose |
| भृत्यस्य | भृत्य (६.१) | of the servant |
| पश्यतः | पश्यत् (√दृश्+शतृ, ६.१) | while seeing |
| प्राणेषु | प्राण (७.३) | while lives |
| विद्यमानेषु | विद्यमान (√विद्+शानच्, ७.३) | existing |
| सः | तद् (१.१) | that |
| भृत्यः | भृत्य (१.१) | servant |
| नरकम् | नरक (२.१) | hell |
| व्रजेत् | व्रजेत् (√व्रज् कर्तरि विधिलिङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | would go |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| आ | प | दं | प्रा | प्नु | या | त्स्वा | मी |
| य | स्य | भृ | त्य | स्य | प | श्य | तः |
| प्रा | णे | षु | वि | द्य | मा | ने | षु |
| स | भृ | त्यो | न | र | कं | व्र | जेत् |
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