तच्छ्रुत्वा वायस आह-भोः स्वामिन् ! ग्राम्योऽयमुष्ट्र-नामा जीव-विशेषस्तव भोज्यः
तद्व्यापाद्यताम्
सिंह आह-नाहं गृहमागतं हन्मि
उक्तं च- गृहं शत्रुमपि प्राप्तं विश्वस्तमकुतोभयम्
यो हन्यात्तस्य पापं स्याच्छतब्राह्मणघातजम्
तच्छ्रुत्वा वायस आह-भोः स्वामिन् ! ग्राम्योऽयमुष्ट्र-नामा जीव-विशेषस्तव भोज्यः
तद्व्यापाद्यताम्
सिंह आह-नाहं गृहमागतं हन्मि
उक्तं च- गृहं शत्रुमपि प्राप्तं विश्वस्तमकुतोभयम्
यो हन्यात्तस्य पापं स्याच्छतब्राह्मणघातजम्
तद्व्यापाद्यताम्
सिंह आह-नाहं गृहमागतं हन्मि
उक्तं च- गृहं शत्रुमपि प्राप्तं विश्वस्तमकुतोभयम्
यो हन्यात्तस्य पापं स्याच्छतब्राह्मणघातजम्
अन्वयः
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गृहं प्राप्तं विश्वस्तं अकुतोभयं शत्रुं अपि यः हन्यात् तस्य शत-ब्राह्मण-घात-जं पापं स्यात्।
Summary
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If one kills even an enemy who has come to one's home seeking trust and safety, one incurs the sin equivalent to the slaughter of a hundred brāhmaṇas.
सारांश
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सिंह ने कहा कि वह शरण में आए विश्वासपात्र शत्रु का वध नहीं करेगा, क्योंकि ऐसा करने से सौ ब्राह्मणों की हत्या के समान पाप लगता है।
पदच्छेदः
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| तत् | तद् (२.१) | that |
| श्रुत्वा | श्रुत्वा (√श्रु+क्त्वा) | having heard |
| वायसः | वायस (१.१) | the crow |
| आह | आह | said |
| भोः | भोस् (८.१) | O! |
| स्वामिन् | स्वामिन् (८.१) | master |
| ग्राम्यः | ग्राम्य (१.१) | domestic |
| अयम् | इदम् (१.१) | this |
| उष्ट्र-नामा | उष्ट्र–नामन् (१.१) | named camel |
| जीव-विशेषः | जीव–विशेष (१.१) | a particular animal |
| तव | युष्मद् (६.१) | your |
| भोज्यः | भोज्य (√भुज्+ण्यत्, १.१) | fit to be eaten |
| तत् | तद् | therefore |
| व्यापाद्यताम् | व्यापाद्यताम् (वि√आपद् +णिच् भावकर्मणोः लोट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | let him be killed |
| सिंहः | सिंह (१.१) | the lion |
| आह | आह | said |
| न | न | not |
| अहम् | अस्मद् (१.१) | I |
| गृहम् | गृह (२.१) | home |
| आगतम् | आगत (आ√गम्+क्त, २.१) | one who has come |
| हन्मि | हन्मि (√हन् कर्तरि लट् (परस्मै.) उ.पु. एक.) | I kill |
| उक्तम् | उक्त (√वच्+क्त, १.१) | said |
| च | च | and |
| गृहम् | गृह (२.१) | home |
| शत्रुम् | शत्रु (२.१) | enemy |
| अपि | अपि | even |
| प्राप्तम् | प्राप्त (प्र√आप्+क्त, २.१) | one who has arrived |
| विश्वस्तम् | विश्वस्त (वि√श्वस्+क्त, २.१) | trusted |
| अकुतोभयम् | अकुतोभय (२.१) | fearless |
| यः | यद् (१.१) | whoever |
| हन्यात् | हन्यात् (√हन् कर्तरि विधिलिङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | would kill |
| तस्य | तद् (६.१) | his |
| पापम् | पाप (१.१) | sin |
| स्यात् | स्यात् (√अस् कर्तरि विधिलिङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | would be |
| शत-ब्राह्मण-घात-जम् | शत–ब्राह्मण–घात–ज (१.१) | born of killing a hundred brahmins |
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