मृगा मृगैः सङ्गमनुव्रजन्ति
गावश्च गोभिस्तुरगास्तुरगैः ।
मूर्खाश्च मूर्खैः सुधियः सुधीभिः
समानशीलव्यसनेन सख्यम् ॥
मृगा मृगैः सङ्गमनुव्रजन्ति
गावश्च गोभिस्तुरगास्तुरगैः ।
मूर्खाश्च मूर्खैः सुधियः सुधीभिः
समानशीलव्यसनेन सख्यम् ॥
गावश्च गोभिस्तुरगास्तुरगैः ।
मूर्खाश्च मूर्खैः सुधियः सुधीभिः
समानशीलव्यसनेन सख्यम् ॥
अन्वयः
AI
मृगाः मृगैः सह सङ्गमम् अनुव्रजन्ति, गावः च गोभिः, तुरगाः तुरगैः, मूर्खाः च मूर्खैः, सुधियः सुधीभिः (सह अनुव्रजन्ति), सख्यम् समान-शील-व्यसनेन (भवति)।
Summary
AI
Deer follow deer, cows follow cows, and horses follow horses. Fools associate with fools, and the wise with the wise. Friendship is based on similar character and habits.
सारांश
AI
समान स्वभाव और आदतों वाले प्राणियों में ही मित्रता होती है; जैसे हिरण हिरणों के साथ और बुद्धिमान बुद्धिमानों के साथ ही मेल रखते हैं।
पदच्छेदः
AI
| मृगा | मृग (१.३) | deer |
| मृगैः | मृग (३.३) | with deer |
| सङ्गमम् | सङ्गम (२.१) | association |
| अनुव्रजन्ति | अनुव्रजन्ति (अनु√व्रज् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.) | follow |
| गावश्च | गो (१.३)–च | and cows |
| गोभिस्तुरगास्तुरगैः | गो (३.३)–तुरग (१.३)–तुरग (३.३) | with cows, horses with horses |
| मूर्खाश्च | मूर्ख (१.३)–च | and fools |
| मूर्खैः | मूर्ख (३.३) | with fools |
| सुधियः | सुधी (१.३) | wise people |
| सुधीभिः | सुधी (३.३) | with wise people |
| समान-शील-व्यसनेन | समान–शील–व्यसन (३.१) | by similar character and habits |
| सख्यम् | सख्य (१.१) | friendship |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| मृ | गा | मृ | गैः | स | ङ्ग | म | नु | व्र | ज | न्ति |
| गा | व | श्च | गो | भि | स्तु | र | गा | स्तु | र | गैः |
| मू | र्खा | श्च | मू | र्खैः | सु | धि | यः | सु | धी | भिः |
| स | मा | न | शी | ल | व्य | स | ने | न | स | ख्यम् |
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.