अन्वयः
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यैः सेवा श्व-वृत्तिः आख्याता, तैः मिथ्या प्रजल्पितम्। अत्र श्वा स्वच्छन्दम् चरति, (किन्तु) सेवकः पर-शासनात् (चरति)।
Summary
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Those who called service the "life of a dog" spoke falsely. For a dog moves about freely, whereas a servant moves only under the command of another.
सारांश
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सेवा को कुत्ते की वृत्ति कहना गलत है, क्योंकि कुत्ता तो स्वतंत्र घूमता है जबकि सेवक पूर्णतः स्वामी के नियंत्रण में रहता है।
पदच्छेदः
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| सेवा | सेवा (१.१) | service |
| श्व-वृत्तिः | श्वन्–वृत्ति (१.१) | dog's livelihood |
| आख्याता | आख्यात (आ√ख्या+क्त, १.१) | called |
| यैः | यद् (३.३) | by whom |
| तैः | तद् (३.३) | by them |
| मिथ्या | मिथ्या | falsely |
| प्रजल्पितम् | प्रजल्पित (प्र√जल्प्+क्त, १.१) | spoken |
| स्वच्छन्दं | स्वच्छन्द (२.१) | freely |
| चरति | चरति (√चर् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | acts |
| स्व | स्व (१.१) | oneself |
| अत्र | अत्र | here |
| सेवकः | सेवक (१.१) | servant |
| पर-शासनात् | पर–शासन (५.१) | from another's command |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| से | वा | श्व | वृ | त्ति | रा | ख्या | ता |
| यै | स्तै | र्मि | थ्या | प्र | ज | ल्पि | तम् |
| स्व | च्छ | न्दं | च | र | ति | स्वा | त्र |
| से | व | कः | प | र | शा | स | नात् |
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