पुनस्त्वमग्निमुखश्चपलश्च-तद्यदि मया सह रक्त-पानं करोषि तत्तिष्ठ
अभीष्टतर-रक्तमास्वादय
सोऽब्रवीत्-भगवत्येवं करिष्यामि
यावत्त्वं नास्वादयसि प्रथमं नृप-रक्तं तावन्मम देव-गुरु-कृतः शपथः स्याद्यदि तदास्वादयामि
एवं तयोः परस्परं वदतोः स राजा तच्-छयनमासाद्य प्रसुप्तः
अथासौ मत्कुणो जिह्वा-लौल्योत्कृष्टौत्सुक्याज्जाग्रतमपि तं मही-पतिमदशत्
अथ वा साध्विदमुच्यते
स्वभावो नोपदेशेन शक्यते कर्तुमन्यथा
सुतप्तमपि पानीयं पुनर्गच्छति शीतताम्
पुनस्त्वमग्निमुखश्चपलश्च-तद्यदि मया सह रक्त-पानं करोषि तत्तिष्ठ
अभीष्टतर-रक्तमास्वादय
सोऽब्रवीत्-भगवत्येवं करिष्यामि
यावत्त्वं नास्वादयसि प्रथमं नृप-रक्तं तावन्मम देव-गुरु-कृतः शपथः स्याद्यदि तदास्वादयामि
एवं तयोः परस्परं वदतोः स राजा तच्-छयनमासाद्य प्रसुप्तः
अथासौ मत्कुणो जिह्वा-लौल्योत्कृष्टौत्सुक्याज्जाग्रतमपि तं मही-पतिमदशत्
अथ वा साध्विदमुच्यते
स्वभावो नोपदेशेन शक्यते कर्तुमन्यथा
सुतप्तमपि पानीयं पुनर्गच्छति शीतताम्
अभीष्टतर-रक्तमास्वादय
सोऽब्रवीत्-भगवत्येवं करिष्यामि
यावत्त्वं नास्वादयसि प्रथमं नृप-रक्तं तावन्मम देव-गुरु-कृतः शपथः स्याद्यदि तदास्वादयामि
एवं तयोः परस्परं वदतोः स राजा तच्-छयनमासाद्य प्रसुप्तः
अथासौ मत्कुणो जिह्वा-लौल्योत्कृष्टौत्सुक्याज्जाग्रतमपि तं मही-पतिमदशत्
अथ वा साध्विदमुच्यते
स्वभावो नोपदेशेन शक्यते कर्तुमन्यथा
सुतप्तमपि पानीयं पुनर्गच्छति शीतताम्
अन्वयः
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स्वभावः उपदेशेन अन्यथा कर्तुम् न शक्यते। सु-तप्तम् अपि पानीयम् पुनः शीतताम् गच्छति।
Summary
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An innate nature cannot be changed through instruction. Just as water, no matter how much it is heated, eventually returns to its natural state of coolness, one's true character persists.
सारांश
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उपदेश से स्वभाव को नहीं बदला जा सकता; गर्म किया हुआ जल भी अंततः ठंडा ही हो जाता है।
पदच्छेदः
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| पुनः | पुनः | again |
| त्वम् | युष्मद् (१.१) | you |
| अग्निमुखः | अग्नि–मुख (१.१) | fire-mouthed |
| चपलः | चपल (१.१) | fickle |
| च | च | and |
| तत् | तद् | therefore |
| यदि | यदि | if |
| मया | अस्मद् (३.१) | with me |
| सह | सह | with |
| रक्त-पानम् | रक्त–पान (२.१) | blood-drinking |
| करोषि | करोषि (√कृ कर्तरि लट् (परस्मै.) म.पु. एक.) | you do |
| तत् | तद् | then |
| तिष्ठ | तिष्ठ (√स्था कर्तरि लोट् (परस्मै.) म.पु. एक.) | stay |
| अभीष्टतर-रक्तम् | अभीष्टतर–रक्त (२.१) | most desired blood |
| आस्वादय | आस्वादय (आ√स्वद् +णिच् कर्तरि लोट् (परस्मै.) म.पु. एक.) | taste |
| सः | तद् (१.१) | he |
| अब्रवीत् | अब्रवीत् (√ब्रू कर्तरि लङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | said |
| भगवति | भगवती (८.१) | O revered one |
| एवम् | एवम् | thus |
| करिष्यामि | करिष्यामि (√कृ कर्तरि लृट् (परस्मै.) उ.पु. एक.) | I will do |
| यावत् | यावत् | as long as |
| त्वम् | युष्मद् (१.१) | you |
| न | न | not |
| आस्वादयसि | आस्वादयसि (आ√स्वद् +णिच् कर्तरि लट् (परस्मै.) म.पु. एक.) | taste |
| प्रथमम् | प्रथम | first |
| नृप-रक्तम् | नृप–रक्त (२.१) | king's blood |
| तावत् | तावत् | then |
| मम | अस्मद् (६.१) | my |
| देव-गुरु-कृतः | देव–गुरु–कृत (१.१) | made by gods and gurus |
| शपथः | शपथ (१.१) | oath |
| स्यात् | स्यात् (√अस् कर्तरि विधिलिङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | would be |
| यदि | यदि | if |
| तत् | तद् (२.१) | that |
| आस्वादयामि | आस्वादयामि (आ√स्वद् +णिच् कर्तरि लट् (परस्मै.) उ.पु. एक.) | I taste |
| एवम् | एवम् | thus |
| तयोः | तद् (६.२) | of those two |
| परस्परम् | परस्पर | mutually |
| वदतोः | वदत् (√वदत्+शतृ, ६.२) | while speaking |
| सः | तद् (१.१) | that |
| राजा | राजन् (१.१) | king |
| तत्-शयनम् | तद्–शयन (२.१) | that bed |
| आसाद्य | आसाद्य (आ√सद्+ल्यप्) | having reached |
| प्रसुप्तः | प्रसुप्त (√प्रसुप्त+क्त, १.१) | fell asleep |
| अथ | अथ | then |
| असौ | अदस् (१.१) | that |
| मत्कुणः | मत्कुण (१.१) | bug |
| जिह्वा-लौल्योत्कृष्टौत्सुक्यात् | जिह्वा–लौल्य–उत्कृष्ट–औत्सुक्य (५.१) | due to extreme eagerness from tongue's greed |
| जाग्रतम् | जाग्रत् (√जाग्रत्+शतृ, २.१) | awake |
| अपि | अपि | even |
| तम् | तद् (२.१) | him |
| मही-पतिम् | मही–पति (२.१) | the king |
| अदशत् | अदशत् (√दंश् कर्तरि लङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | bit |
| अथ | अथ | or |
| वा | वा | or |
| साधु | साधु | well |
| इदम् | इदम् (१.१) | this |
| उच्यते | उच्यते (√वच् भावकर्मणोः लट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | is said |
| स्वभावः | स्वभाव (१.१) | nature |
| न | न | not |
| उपदेशेन | उपदेश (३.१) | by instruction |
| शक्यते | शक्यते (√शक् भावकर्मणोः लट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | is able |
| कर्तुम् | कर्तुम् (√कृ+तुमुन्) | to do |
| अन्यथा | अन्यथा | otherwise |
| सुतप्तम् | सुतप्त (√सुतप्त+क्त, १.१) | well-heated |
| अपि | अपि | even |
| पानीयम् | पानीय (१.१) | water |
| पुनः | पुनः | again |
| गच्छति | गच्छति (√गम् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | goes |
| शीतताम् | शीतता (२.१) | coldness |
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