यो नात्मना न च परेण च बन्धुवर्गे
दीने दयां न कुरुते न च मर्त्यवर्गे ।
किं तस्य जीवितफलं हि मनुष्यलोके
काकोऽपि जीवति चिराय बलिं च भुङ्क्ते ॥
यो नात्मना न च परेण च बन्धुवर्गे
दीने दयां न कुरुते न च मर्त्यवर्गे ।
किं तस्य जीवितफलं हि मनुष्यलोके
काकोऽपि जीवति चिराय बलिं च भुङ्क्ते ॥
दीने दयां न कुरुते न च मर्त्यवर्गे ।
किं तस्य जीवितफलं हि मनुष्यलोके
काकोऽपि जीवति चिराय बलिं च भुङ्क्ते ॥
अन्वयः
AI
यः आत्मना न च परेण च बन्धु-वर्गे दीने च मर्त्य-वर्गे दयां न कुरुते, तस्य मनुष्य-लोके जीवित-फलं किं हि? काकः अपि चिराय जीवति बलिं च भुङ्क्ते।
Summary
AI
What is the purpose of life for one who shows no compassion to themselves, others, kin, the poor, or humanity? Even a crow lives a long life, feeding on scraps.
सारांश
AI
जो व्यक्ति अपने बंधुओं, दीन-दुखियों और समाज पर दया नहीं करता, उसके मनुष्य लोक में जीने का कोई लाभ नहीं है, चाहे वह कौए की तरह लंबी आयु पाए।
पदच्छेदः
AI
| यः | यद् (१.१) | who |
| न | न | not |
| आत्मना | आत्मन् (३.१) | by oneself |
| न | न | not |
| च | च | and |
| परेण | पर (३.१) | by another |
| च | च | and |
| बन्धु-वर्गे | बन्धु–वर्ग (७.१) | in the group of relatives |
| दीने | दीन (७.१) | distressed |
| दयाम् | दया (२.१) | compassion |
| न | न | not |
| कुरुते | कुरुते (√कृ कर्तरि लट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | does |
| न | न | not |
| च | च | and |
| मर्त्य-वर्गे | मर्त्य–वर्ग (७.१) | in the group of mortals |
| किम् | किम् | what |
| तस्य | तद् (६.१) | his |
| जीवित-फलम् | जीवित–फल (१.१) | fruit of life |
| हि | हि | indeed |
| मनुष्य-लोके | मनुष्य–लोक (७.१) | in the human world |
| काकः | काक (१.१) | crow |
| अपि | अपि | also |
| जीवति | जीवति (√जीव् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | lives |
| चिराय | चिराय | for a long time |
| बलिम् | बलि (२.१) | offering |
| च | च | and |
| भुङ्क्ते | भुङ्क्ते (√भुज् कर्तरि लट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | eats |
छन्दः
वसन्ततिलका [१४: तभजजगग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| यो | ना | त्म | ना | न | च | प | रे | ण | च | ब | न्धु | व | र्गे |
| दी | ने | द | यां | न | कु | रु | ते | न | च | म | र्त्य | व | र्गे |
| किं | त | स्य | जी | वि | त | फ | लं | हि | म | नु | ष्य | लो | के |
| का | को | ऽपि | जी | व | ति | चि | रा | य | ब | लिं | च | भु | ङ्क्ते |
| त | भ | ज | ज | ग | ग | ||||||||
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.