अन्वयः
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चेत् अर्क-नन्दनः अथवा रुधिरः अथवा शशी रोहिणी-शकटम् भिनत्ति, (तदा) किम् वदामि? तत्-अनिष्ट-सागरे सर्व-लोकम् सङ्क्षयः उपयाति।
Summary
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If the son of the Sun (Śani), or the Red Planet (Maṅgala), or the Moon pierces the wain of Rohiṇī, what can I say? In that ocean of misfortune, the entire world meets with destruction.
सारांश
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यदि शनि, मंगल या चंद्रमा रोहिणी के मंडल को भेदते हैं, तो सारा संसार अनिष्ट के सागर में डूबकर विनाश की ओर बढ़ता है।
पदच्छेदः
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| रोहिणी-शकटम् | रोहिणी–शकट (२.१) | cart of Rohini |
| अर्क-नन्दनः | अर्क–नन्दन (१.१) | son of the sun (Saturn) |
| चेत् | चेत् | if |
| भिन्नत्ति | भिन्नत्ति (√भिद् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | breaks |
| रुधिरः | रुधिर (१.१) | Mars |
| अथवा | अथवा | or |
| शशी | शशिन् (१.१) | moon |
| किम् | किम् | what |
| वदामि | वदामि (√वद् कर्तरि लट् (परस्मै.) उ.पु. एक.) | I say |
| तत् | तत् | that |
| अनिष्ट-सागरे | अनिष्ट–सागर (७.१) | in the ocean of misfortune |
| सर्व-लोकम् | सर्व–लोक (२.१) | all people/the whole world |
| उपयाति | उपयाति (उप√या कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | reaches/goes into |
| सङ्क्षयः | सङ्क्षय (१.१) | destruction |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| रो | हि | णी | श | क | ट | म | र्क | न | न्द | न |
| श्चे | द्भि | न्न | त्ति | रु | धि | रो | ऽथ | वा | श | शी |
| किं | व | दा | मि | त | द | नि | ष्ट | सा | ग | रे |
| स | र्व | लो | क | मु | प | या | ति | स | ङ्क्ष | यः |
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