अन्वयः
AI
प्राजापत्ये शकटे भिन्ने (सति) वसुधा पातकम् कृत्वा एव भस्म-अस्थि-शकल-आकीर्णा (सती) कापालिकम् व्रतम् इव धत्ते।
Summary
AI
When the wain of Prajāpati (Rohiṇī) is pierced, the earth, as if having committed a great sin, appears covered with ashes and bone fragments, observing the vow of a Kāpālika ascetic.
सारांश
AI
रोहिणी के मंडल के खंडित होने पर पृथ्वी पापग्रस्त होकर राख और हड्डियों के टुकड़ों से भर जाती है, जैसे कोई कापालिक व्रत धारण किए हो।
पदच्छेदः
AI
| प्राजापत्ये | प्राजापत्य (७.१) | of Prajapati |
| शकट | शकट (७.१) | cart |
| भिन्ने | भिन्न (√भिद्+क्त, ७.१) | broken |
| कृत्वा | कृत्वा (√कृ+क्त्वा) | having done |
| एव | एव | indeed |
| पातकम् | पातक (२.१) | sin |
| वसुधा | वसुधा (१.१) | earth |
| भस्मास्थि-शकलाकीर्णा | भस्म–अस्थि–शकल–आकीर्ण (१.१) | covered with pieces of ash and bone |
| कापालिकम् | कापालिक (२.१) | of a Kapalika |
| इव | इव | like |
| व्रतम् | व्रत (२.१) | vow |
| धत्ते | धत्ते (√धा कर्तरि लट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | holds/assumes |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| प्रा | जा | प | त्ये | श | क | टे | भि | न्ने |
| कृ | त्वै | व | पा | त | कं | व | सु | धा |
| भ | स्मा | स्थि | श | क | ला | की | र्णा | का |
| पा | लि | क | मि | व | व्र | तं | ध | त्ते |
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.