अन्वयः
AI
यस्मिन् जीवति बहवः जीवन्ति, सः अत्र जीवतु। वयांसि चञ्च्वा स्व-उदर-पूरणं किं न कुर्वन्ति?
Summary
AI
Only he truly lives whose life enables many others to live. Do birds not also fill their own bellies with their beaks?
सारांश
AI
संसार में उसी का जीवन सार्थक है जिसके जीवित रहने से बहुतों का भरण-पोषण हो, अन्यथा पक्षी भी चोंच से अपना पेट तो भर ही लेते हैं।
पदच्छेदः
AI
| यस्मिन् | यद् (७.१) | in whom |
| जीवन्ति | जीवत् (√जीव्+शतृ, ७.१) | live |
| जीवन्ति | जीवन्ति (√जीव् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.) | live |
| बहवः | बहु (१.३) | many |
| सः | तद् (१.१) | he |
| अत्र | अत्र | here |
| जीवतु | जीवतु (√जीव् कर्तरि लोट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | let him live |
| वयांसि | वयस् (१.३) | birds |
| किम् | किम् | why |
| न | न | not |
| कुर्वन्ति | कुर्वन्ति (√कृ कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.) | do |
| चञ्च्वा | चञ्चु (३.१) | with beak |
| स्वोदर-पूरणम् | स्व–उदर–पूरण (२.१) | filling one's own belly |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| य | स्मि | ञ्जी | व | ति | जी | व | न्ति |
| ब | ह | वः | सो | ऽत्र | जी | व | तु |
| व | यां | सि | किं | न | कु | र्व | न्ति |
| च | ञ्च्वा | स्वो | द | र | पू | र | णम् |
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.