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सुहृदामुपकारकारणा-
द्द्विषतामप्यपकारकारणात् ।
नृपसंश्रय इष्यते बुधै-
र्जठरं को न बिभर्ति केवलम् ॥

अन्वयः AI सुहृदाम् उपकार-कारणात् द्विषताम् अपि अपकार-कारणात् बुधैः नृप-संश्रयः इष्यते, केवलं जठरं कः न बिभर्ति?
Summary AI Wise men seek the patronage of a king to benefit friends and harm enemies; for who does not fill their own stomach alone?
सारांश AI विद्वान लोग मित्रों के उपकार और शत्रुओं के दमन के लिए राजा का आश्रय लेते हैं, क्योंकि केवल अपना पेट तो कोई भी भर लेता है।
पदच्छेदः AI
सुहृदाम्सुहृद् (६.३) of friends
उपकारकारणात्उपकारणकारण (५.१) for the sake of help
द्विषताम्द्विषत् (६.३) of enemies
अपिअपि even
अपकारकारणात्अपकारकारण (५.१) for the sake of harm
नृप-संश्रयःनृपसंश्रय (१.१) shelter of a king
इष्यतेइष्यते (√इष् भावकर्मणोः लट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) is desired
बुधैःबुध (३.३) by the wise
जठरम्जठर (२.१) belly
कःकिम् (१.१) who
not
बिभर्तिबिभर्ति (√भृ कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) supports
केवलम्केवल merely
छन्दः वियोगिनी []
छन्दोविश्लेषणम्
१० ११
सु हृ दा मु का का णा
द्द्वि ता प्य का का णात्
नृ सं श्र ष्य ते बु धै
र्ज रं को बि र्ति के लम्
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