कुर्वन्ति तावत्प्रथमं प्रियाणि
यावन्न जानन्ति नरं प्रसक्तम् ।
ज्ञात्वा च तं मन्मथपाशबद्धं
ग्रस्तामिषं मीनमिवोद्धरन्ति ॥

अन्वयः AI (ताः) तावत् प्रथमम् प्रियाणि कुर्वन्ति यावत् नरम् प्रसक्तम् न जानन्ति (ताः) तम् मन्मथ-पाश-बद्धम् ज्ञात्वा च ग्रस्त-आमिषम् मीनम् इव उद्धरन्ति ।
Summary AI Women perform pleasing acts only as long as they do not perceive a man to be fully attached to them. Once they realize he is securely bound by the snares of Kāmadeva, they haul him up like a fish that has swallowed the bait.
सारांश AI स्त्रियाँ तब तक ही प्रेम करती हैं जब तक पुरुष उनमें पूरी तरह आसक्त न हो जाए। जैसे ही उन्हें पता चलता है कि पुरुष कामदेव के पाश में बँध चुका है, वे उसे मांस के लोभ में फंसी मछली की तरह खींच लेती हैं।
पदच्छेदः AI
कुर्वन्तिकुर्वन्ति (√कृ कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.) they do
तावत्तावत् so long
प्रथमंप्रथम (२.१) first
प्रियाणिप्रिय (२.३) pleasant things
यावत्यावत् as long as
not
जानन्तिजानन्ति (√ज्ञा कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.) they know
नरंनर (२.१) a man
प्रसक्तम्प्रसक्त (प्र√सन्ज्+क्त, २.१) infatuated
ज्ञात्वाज्ञात्वा (√ज्ञा+क्त्वा) having known
and
तंतद् (२.१) him
मन्मथ-पाश-बद्धंमन्मथपाशबद्ध (√बन्ध्+क्त, २.१) bound by the noose of Cupid
ग्रस्तामिषंग्रस्त (√ग्रस्+क्त)आमिष (२.१) having swallowed bait
मीनम्मीन (२.१) a fish
इवइव like
उद्धरन्तिउद्धरन्ति (उत्√हृ कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.) they pull out
छन्दः इन्द्रवज्रा [११: ततजगग]
छन्दोविश्लेषणम्
१० ११
कु र्व न्ति ता त्प्र मं प्रि या णि
या न्न जा न्ति रं प्र क्तम्
ज्ञा त्वा तं न्म पा द्धं
ग्र स्ता मि षं मी मि वो द्ध न्ति
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