कार्कश्यं स्तनयोर्दृशोस्तरलतालीकं मुखे श्लाघ्यते
कौटिल्यं कचसंचये च वचने मान्द्यं त्रिके स्थूलता ।
भीरुत्वं हृदये सदैव कथितं मायाप्रयोगः प्रिये
यासां दोषगणो गुणो मृगदृशां ताः स्युर्नराणां प्रियाः ॥
कार्कश्यं स्तनयोर्दृशोस्तरलतालीकं मुखे श्लाघ्यते
कौटिल्यं कचसंचये च वचने मान्द्यं त्रिके स्थूलता ।
भीरुत्वं हृदये सदैव कथितं मायाप्रयोगः प्रिये
यासां दोषगणो गुणो मृगदृशां ताः स्युर्नराणां प्रियाः ॥
कौटिल्यं कचसंचये च वचने मान्द्यं त्रिके स्थूलता ।
भीरुत्वं हृदये सदैव कथितं मायाप्रयोगः प्रिये
यासां दोषगणो गुणो मृगदृशां ताः स्युर्नराणां प्रियाः ॥
अन्वयः
AI
यासाम् मृग-दृशाम् स्तनयोः कार्कश्यम् दृशोः तरलता मुखे अलीकम् कच-संचये च कौटिल्यम् वचने मान्द्यम् त्रिके स्थूलता हृदये सदैव भीरुत्वम् प्रिये माया-प्रयोगः (अस्ति) (तथा) यासाम् दोष-गणः गुणः (श्लाघ्यते) ताः नराणाम् प्रियाः स्युः ।
Summary
AI
For these deer-eyed women, hardness in their breasts, flickering eyes, falsehood in their expressions, crookedness in their hair, slowness in speech, heaviness in their hips, constant fear in their hearts, and deception toward their lovers are all praised. Their collection of faults is regarded as merit, making them beloved to men.
सारांश
AI
स्तनों की कठोरता, आँखों की चंचलता, वाणी का झूठ, केशों का टेढ़ापन और हृदय की भीरुता जैसे दोषों को भी स्त्रियाँ पुरुषों के सामने गुण बनाकर प्रस्तुत करती हैं, जिससे वे उन पर मोहित हो जाते हैं।
पदच्छेदः
AI
| कार्कश्यं | कार्कश्य (१.१) | hardness/harshness |
| स्तनयोः | स्तन (६.२) | of breasts |
| दृशोः | दृश् (६.२) | of eyes |
| तरलता | तरलता (१.१) | fickleness/restlessness |
| अलीकं | अलीक (१.१) | falsehood/deceit |
| मुखे | मुख (७.१) | in the face/mouth |
| श्लाघ्यते | श्लाघ्यते (√श्लाघ् भावकर्मणोः लट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | is praised/extolled |
| कौटिल्यं | कौटिल्य (१.१) | crookedness/cunning |
| कच-संचये | कच–संचय (७.१) | in the mass of hair |
| च | च | and |
| वचने | वचन (७.१) | in speech |
| मान्द्यं | मान्द्य (१.१) | slowness/dullness |
| त्रिके | त्रिक (७.१) | in the hips/loins |
| स्थूलता | स्थूलता (१.१) | plumpness/largeness |
| भीरुत्वं | भीरुत्व (१.१) | timidity/cowardice |
| हृदये | हृदय (७.१) | in the heart |
| सदा | सदा | always |
| एव | एव | indeed |
| कथितं | कथित (√कथ+क्त, १.१) | said/stated |
| माया-प्रयोगः | माया–प्रयोग (१.१) | application of deceit |
| प्रिये | प्रिय (७.१) | in love/beloved |
| यासां | यद् (६.३) | whose |
| दोष-गणः | दोष–गण (१.१) | multitude of faults |
| गुणः | गुण (१.१) | virtue/quality |
| मृग-दृशां | मृग–दृश् (६.३) | of deer-eyed women |
| ताः | तद् (१.३) | those |
| स्युः | स्युः (√अस् कर्तरि विधिलिङ् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.) | they would be |
| नराणां | नर (६.३) | of men |
| प्रियाः | प्रिय (१.३) | beloved |
छन्दः
शार्दूलविक्रीडितम् [१९: मसजसततग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ | १६ | १७ | १८ | १९ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| का | र्क | श्यं | स्त | न | यो | र्दृ | शो | स्त | र | ल | ता | ली | कं | मु | खे | श्ला | घ्य | ते |
| कौ | टि | ल्यं | क | च | सं | च | ये | च | व | च | ने | मा | न्द्यं | त्रि | के | स्थू | ल | ता |
| भी | रु | त्वं | हृ | द | ये | स | दै | व | क | थि | तं | मा | या | प्र | यो | गः | प्रि | ये |
| या | सां | दो | ष | ग | णो | गु | णो | मृ | ग | दृ | शां | ताः | स्यु | र्न | रा | णां | प्रि | याः |
| म | स | ज | स | त | त | ग | ||||||||||||
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.