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अरक्षितं तिष्ठति देवरक्षितं
सुरक्षितं देवहतं विनश्यति ।
जीवत्यनाथोऽपि वने विसर्जितः
कृतप्रयत्नोऽपि गृहे विनश्यति ॥

अन्वयः AI देव-रक्षितम् अरक्षितम् तिष्ठति, सुरक्षितम् देव-हतम् विनश्यति । वने विसर्जितः अनाथः अपि जीवति, गृहे कृत-प्रयत्नः अपि विनश्यति ।
Summary AI That which is protected by fate remains safe even if unguarded, while that which is well-guarded perishes if struck by fate. An orphan abandoned in the forest survives, while one well-cared for at home may perish despite all efforts.
सारांश AI भाग्य से रक्षित लावारिस भी जीवित रहता है, परंतु भाग्य की मार पड़ने पर सुरक्षित भी नष्ट हो जाता है। वन में छोड़ा गया अनाथ भी जीवित रहता है और घर में सुरक्षित भी मर जाता है।
पदच्छेदः AI
अरक्षितम्अरक्षित (१.१) unprotected
तिष्ठतितिष्ठति (√स्था कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) remains
देव-रक्षितम्देवरक्षित (१.१) protected by gods
सुरक्षितम्सुरक्षित (१.१) well-protected
देव-हतम्देवहत (१.१) destroyed by gods
विनश्यतिविनश्यति (वि√नश् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) perishes
जीवतिजीवति (√जीव् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) lives
अनाथःअनाथ (१.१) helpless
अपिअपि even
वनेवन (७.१) in the forest
विसर्जितःविसर्जित (वि√सृज्+क्त, १.१) abandoned
कृत-प्रयत्नःकृतप्रयत्न (१.१) one who has made effort
अपिअपि even
गृहेगृह (७.१) in the house
विनश्यतिविनश्यति (वि√नश् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) perishes
छन्दः वंशस्थम् [१२: जतजर]
छन्दोविश्लेषणम्
१० ११ १२
क्षि तं ति ष्ठ ति दे क्षि तं
सु क्षि तं दे तं वि श्य ति
जी त्य ना थो ऽपि ने वि र्जि तः
कृ प्र त्नो ऽपि गृ हे वि श्य ति
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