अत्तुं वाञ्छति शाम्भवो गणपतेराखुं क्षुधार्तः फणी
तं च क्रौञ्चरिपोः शिखी गिरिसुतासिंहोऽपि नागाशनम् ।
इत्थं यत्र परिग्रहस्य घटना शम्भोरपि स्याद्गृहे
तत्राप्यस्य कथं न भावि जगतो यस्मात्स्वरूपं हि तत् ॥
अत्तुं वाञ्छति शाम्भवो गणपतेराखुं क्षुधार्तः फणी
तं च क्रौञ्चरिपोः शिखी गिरिसुतासिंहोऽपि नागाशनम् ।
इत्थं यत्र परिग्रहस्य घटना शम्भोरपि स्याद्गृहे
तत्राप्यस्य कथं न भावि जगतो यस्मात्स्वरूपं हि तत् ॥
तं च क्रौञ्चरिपोः शिखी गिरिसुतासिंहोऽपि नागाशनम् ।
इत्थं यत्र परिग्रहस्य घटना शम्भोरपि स्याद्गृहे
तत्राप्यस्य कथं न भावि जगतो यस्मात्स्वरूपं हि तत् ॥
अन्वयः
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क्षुधा-आर्तः शाम्भवः फणी गणपतेः आखुम् अत्तुम् वाञ्छति । क्रौञ्च-रिपोः शिखी तम् च (अत्तुम् वाञ्छति) । गिरि-सुता-सिंहः अपि नाग-अशनम् (अत्तुम् वाञ्छति) । इत्थम् यत्र शम्भोः अपि गृहे परिग्रहस्य घटना स्यात् तत्र अपि अस्य जगतः कथम् न भावि यस्मात् तत् स्वरूपम् हि ॥
Summary
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Inside Śiva's home, his snake eyes Gaṇapati's mouse, the peacock eyes the snake, and the lion eyes the peacock. If such natural conflict exists in the deity's own household, it is inevitably the inherent nature of the entire world.
सारांश
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शिव के घर में सर्प चूहे को, मोर सर्प को और सिंह मोर को खाना चाहता है; जहाँ परिवार में ही ऐसा स्वाभाविक विरोध हो, वहाँ संसार का स्वरूप भी वैसा ही होना निश्चित है।
पदच्छेदः
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| अत्तुम् | अत्तुम् (√अद्+तुमुन्) | to eat |
| वाञ्छति | वाञ्छति (√वाञ्छ् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | desires |
| शाम्भवः | शाम्भव (१.१) | Shiva's (companion, here snake) |
| गणपतेः | गणपति (६.१) | of Ganesha |
| आखम् | आखू (२.१) | mouse |
| क्षुधार्तः | क्षुधा–आर्त (१.१) | hungry |
| फणी | फणिन् (१.१) | snake |
| तम् | तद् (२.१) | that |
| च | च | and |
| क्रौञ्चरिपोः | क्रौञ्च–रिपु (६.१) | of Kartikeya (enemy of Krauncha) |
| शिखी | शिखिन् (१.१) | peacock |
| गिरिसुतासिंहः | गिरि–सुता–सिंह (१.१) | Parvati's lion |
| अपि | अपि | also |
| नागाशनम् | नाग–अशन (२.१) | snake-eater |
| इत्थम् | इत्थम् | thus |
| यत्र | यत्र | where |
| परिग्रहस्य | परिग्रह (६.१) | of dependents/possessions |
| घटना | घटना (१.१) | occurrence/conflict |
| शम्भोः | शम्भु (६.१) | of Shiva |
| अपि | अपि | even |
| स्यात् | स्यात् (√अस् कर्तरि विधिलिङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | may be |
| गृहे | गृह (७.१) | in the house |
| तत्र | तत्र | there |
| अपि | अपि | even |
| अस्य | इदम् (६.१) | of this |
| कथम् | कथम् | how |
| न | न | not |
| भावि | भावि (√भाविन्+भविष्यत्कृत्, १.१) | will be |
| जगतः | जगत् (६.१) | of the world |
| यस्मात् | यस्मात् | because |
| स्वरूपम् | स्वरूप (१.१) | nature |
| हि | हि | indeed |
| तत् | तद् (१.१) | that |
छन्दः
शार्दूलविक्रीडितम् [१९: मसजसततग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ | १६ | १७ | १८ | १९ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| अ | त्तुं | वा | ञ्छ | ति | शा | म्भ | वो | ग | ण | प | ते | रा | खुं | क्षु | धा | र्तः | फ | णी |
| तं | च | क्रौ | ञ्च | रि | पोः | शि | खी | गि | रि | सु | ता | सिं | हो | ऽपि | ना | गा | श | नम् |
| इ | त्थं | य | त्र | प | रि | ग्र | ह | स्य | घ | ट | ना | श | म्भो | र | पि | स्या | द्गृ | हे |
| त | त्रा | प्य | स्य | क | थं | न | भा | वि | ज | ग | तो | य | स्मा | त्स्व | रू | पं | हि | तत् |
| म | स | ज | स | त | त | ग | ||||||||||||
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