अन्वयः
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सामादि-सज्जितैः पाशैः दिवा-निशम् प्रतीक्षन्ते । शक्त्या हि उपजीवन्ति इव जल-जाः जल-दान् ॥
Summary
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People wait day and night with snares prepared through diplomacy and other means; they subsist by their power upon others, just as aquatic creatures depend on the clouds.
सारांश
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ये सभी साम आदि उपायों के जाल बिछाकर दिन-रात अवसर की प्रतीक्षा करते हैं और दूसरों की शक्ति पर वैसे ही जीवित रहते हैं जैसे जलचर बादलों पर।
पदच्छेदः
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| सामादिसज्जितैः | साम–आदि–सज्जित (३.३) | prepared with conciliation etc. |
| पाशैः | पाश (३.३) | with snares |
| प्रतीक्षन्ते | प्रतीक्षन्ते (प्रति√ईक्ष् कर्तरि लट् (आत्मने.) प्र.पु. बहु.) | they wait |
| दिवानिशम् | दिवानिशम् | day and night |
| उपजीवन्ति | उपजीवन्ति (उप√जीव् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.) | they live upon |
| शक्त्या | शक्ति (३.१) | by power |
| हि | हि | indeed |
| जलजाः | जलज (१.३) | water-born creatures |
| जलदान् | जलद (२.३) | clouds |
| इव | इव | like |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| सा | मा | दि | स | ज्जि | तैः | पा | शैः |
| प्र | ती | क्ष | न्ते | दि | वा | नि | शम् |
| उ | प | जी | व | न्ति | श | क्त्या | हि |
| ज | ल | जा | ज | ल | दा | नि | व |
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