अन्वयः
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अपि भीरुः कापुरुषः नृपति-सेवकः स्यात् चेत्, तथापि सः मानवः जनात् पराभूतिम् न आप्नोति।
Summary
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Even if a man is a coward or a pathetic soul, should he be a servant of the king, he does not suffer humiliation from the common people.
सारांश
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यदि कोई पुरुष कायर और डरपोक भी हो, किंतु वह राजा का सेवक है, तो वह समाज में किसी से तिरस्कृत या पराजित नहीं होता।
पदच्छेदः
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| अपि | अपि | even if |
| कापुरुषः | कापुरुष (१.१) | cowardly |
| भीरुः | भीरु (१.१) | timid |
| स्यात् | स्यात् (√अस् कर्तरि विधिलिङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | may be |
| चेत् | चेत् | if |
| नृपति-सेवकः | नृपति–सेवक (१.१) | a king's servant |
| तथापि | तथापि | nevertheless |
| न | न | not |
| पराभूतिं | पराभूति (२.१) | humiliation |
| जनात् | जन (५.१) | from people |
| आप्नोति | आप्नोति (√आप् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | obtains |
| मानवः | मानव (१.१) | a man |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| अ | पि | का | पु | रु | षो | भी | रुः |
| स्या | च्चे | न्नृ | प | ति | से | व | कः |
| त | था | पि | न | प | रा | भू | तिं |
| ज | ना | दा | प्नो | ति | मा | न | वः |
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