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अकुलीनोऽपि मूर्खोऽपि भूपालं योऽत्र सेवते ।
अपि संमानहीनोऽपि स सर्वत्र प्रपूज्यते ॥

अन्वयः AI अत्र यः अकुलीनः अपि मूर्खः अपि सम्मान-हीनः अपि भूपालम् सेवते, सः सर्वत्र प्रपूज्यते।
Summary AI In this world, even one who is of low birth, foolish, or devoid of honor is respected everywhere if they serve the king.
सारांश AI राजा की सेवा करने वाला व्यक्ति चाहे नीच कुल का हो या मूर्ख, वह राज-आश्रय के कारण सर्वत्र सम्मान प्राप्त करता है।
पदच्छेदः AI
अकुलीनःअकुलीन (१.१) of low birth
अपिअपि even if
मूर्खःमूर्ख (१.१) foolish
अपिअपि even if
भूपालंभूपाल (२.१) a king
यःयद् (१.१) whoever
अत्रअत्र here
सेवतेसेवते (√सेव् कर्तरि लट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) serves
अपिअपि even if
संमानहीनःसंमानहीन (१.१) devoid of honor
अपिअपि even if
सःतद् (१.१) that person
सर्वत्रसर्वत्र everywhere
प्रपूज्यतेप्रपूज्यते (प्र√पूज् भावकर्मणोः लट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) is revered
छन्दः अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
कु ली नो ऽपि मू र्खो ऽपि
भू पा लं यो ऽत्र से ते
पि सं मा ही नो ऽपि
र्व त्र प्र पू ज्य ते
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