कोऽर्थान्प्राप्य न गर्वितो विषयिणः कस्यापदोऽस्तं गताः
स्त्रीभिः कस्य न खण्डितं भुवि मनः को नामा राज्ञां प्रियः ।
कः कालस्य न गोचरान्तरगतः कोऽर्थी गतो गौरवं
को वा दुर्जनवागुरासु पतितः क्षेमेण यातः पुमान् ॥
कोऽर्थान्प्राप्य न गर्वितो विषयिणः कस्यापदोऽस्तं गताः
स्त्रीभिः कस्य न खण्डितं भुवि मनः को नामा राज्ञां प्रियः ।
कः कालस्य न गोचरान्तरगतः कोऽर्थी गतो गौरवं
को वा दुर्जनवागुरासु पतितः क्षेमेण यातः पुमान् ॥
स्त्रीभिः कस्य न खण्डितं भुवि मनः को नामा राज्ञां प्रियः ।
कः कालस्य न गोचरान्तरगतः कोऽर्थी गतो गौरवं
को वा दुर्जनवागुरासु पतितः क्षेमेण यातः पुमान् ॥
अन्वयः
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अर्थान् प्राप्य कः न गर्वितः? कस्य विषयिणः आपदः अस्तम् गताः? भुवि स्त्रीभिः कस्य मनः न खण्डितम्? राज्ञाम् प्रियः नाम कः? कः कालस्य गोचर-अन्तर-गतः न? कः अर्थी गौरवम् गतः? वा दुर्जन-वागुरासु पतितः कः पुमान् क्षेमेण यातः?
Summary
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Who is not arrogant with wealth? Whose calamities have ended? Whose mind is not broken by women? Who is dear to kings? Who escapes Time? Which beggar has dignity? Who, once snared by the wicked, escapes safely?
सारांश
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धन पाकर कौन अभिमानी नहीं हुआ, किसकी विपत्तियाँ सदा के लिए टलीं, और कौन दुष्टों के चंगुल से बचकर सकुशल निकल पाया?
पदच्छेदः
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| कः | किम् (१.१) | who |
| अर्थान् | अर्थ (२.३) | wealth |
| प्राप्य | प्राप्य (प्र√आप्+ल्यप्) | having obtained |
| न | न | not |
| गर्वितः | गर्वित (१.१) | arrogant |
| विषयिणः | विषयिन् (६.१) | of a sensualist |
| कस्य | किम् (६.१) | whose |
| आपदः | आपद् (१.३) | calamities |
| अस्तं | अस्त (२.१) | end |
| गताः | गत (√गम्+क्त, १.३) | gone |
| स्त्रीभिः | स्त्री (३.३) | by women |
| कस्य | किम् (६.१) | whose |
| न | न | not |
| खण्डितं | खण्डित (√खण्ड्+क्त, १.१) | broken |
| भुवि | भू (७.१) | on earth |
| मनः | मनस् (१.१) | mind |
| कः | किम् (१.१) | who |
| नाम | नाम | indeed/pray tell |
| राज्ञां | राजन् (६.३) | of kings |
| प्रियः | प्रिय (१.१) | dear |
| कः | किम् (१.१) | who |
| कालस्य | काल (६.१) | of time |
| न | न | not |
| गोचरान्तर-गतः | गोचर–अन्तर–गत (१.१) | fallen within the range |
| कः | किम् (१.१) | who |
| अर्थी | अर्थिन् (१.१) | a supplicant |
| गतः | गत (√गम्+क्त, १.१) | attained |
| गौरवं | गौरव (२.१) | respect |
| कः | किम् (१.१) | who |
| वा | वा | or |
| दुर्जन-वागुरासु | दुर्जन–वागुरा (७.३) | in the snares of wicked people |
| पतितः | पतित (√पत्+क्त, १.१) | fallen |
| क्षेमेण | क्षेम (३.१) | safely |
| यातः | यात (√या+क्त, १.१) | gone/escaped |
| पुमान् | पुम्स् (१.१) | a man |
छन्दः
शार्दूलविक्रीडितम् [१९: मसजसततग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ | १६ | १७ | १८ | १९ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| को | ऽर्था | न्प्रा | प्य | न | ग | र्वि | तो | वि | ष | यि | णः | क | स्या | प | दो | ऽस्तं | ग | ताः |
| स्त्री | भिः | क | स्य | न | ख | ण्डि | तं | भु | वि | म | नः | को | ना | मा | रा | ज्ञां | प्रि | यः |
| कः | का | ल | स्य | न | गो | च | रा | न्त | र | ग | तः | को | ऽर्थी | ग | तो | गौ | र | वं |
| को | वा | दु | र्ज | न | वा | गु | रा | सु | प | ति | तः | क्षे | मे | ण | या | तः | पु | मान् |
| म | स | ज | स | त | त | ग | ||||||||||||
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