अन्वयः
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मनुष्याणाम् अनर्थित्वात् च परिजनस्य भयात् अमर्यादाः स्त्रियः सर्वदा मर्यादायाम् तिष्ठन्ति।
Summary
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It is only due to the lack of suitors or the fear of their kinsmen that unrestrained women remain within the bounds of decorum.
सारांश
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अन्य पुरुषों द्वारा उपेक्षित होने और परिवार के भय के कारण ही चंचल स्वभाव वाली स्त्रियाँ मर्यादा की सीमा में बंधी रहती हैं।
पदच्छेदः
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| अनर्थित्वात् | अनर्थित्व (५.१) | due to lack of need/desire |
| मनुष्याणां | मनुष्य (६.३) | of men |
| भयात् | भय (५.१) | due to fear |
| परिजनस्य | परिजन (६.१) | of family members |
| च | च | and |
| मर्यादायाम् | मर्यादा (७.१) | within limits |
| अमर्यादाः | अमर्याद (१.३) | unrestrained/unbounded |
| स्त्रियः | स्त्री (१.३) | women |
| तिष्ठन्ति | तिष्ठन्ति (√स्था कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.) | remain |
| सर्वदा | सर्वदा | always |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| अ | न | र्थि | त्वा | न्म | नु | ष्या | णां |
| भ | या | त्प | रि | ज | न | स्य | च |
| म | र्या | दा | या | म | म | र्या | दाः |
| स्त्रि | य | स्ति | ष्ठ | न्ति | स | र्व | दा |
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