अन्वयः
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मन्त्रिणाम् भिन्न-सन्धाने, भिषजाम् सान्निपातिके कर्मणि प्रज्ञा व्यज्यते। स्वस्थे कः वा न पण्डितः?
Summary
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The wisdom of ministers is proven in reconciling broken alliances, and that of physicians in treating critical illness; when all is well, who cannot claim to be wise?
सारांश
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मंत्रियों की बुद्धि बिगड़े काम को बनाने में और वैद्यों की बुद्धि गंभीर रोग में प्रकट होती है; सामान्य स्थिति में सभी बुद्धिमान होते हैं।
पदच्छेदः
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| मन्त्रिणाम् | मन्त्रिन् (६.३) | of ministers |
| भिन्न-सन्धाने | भिन्न–सन्धान (७.१) | in uniting the divided |
| भिषजाम् | भिषज् (६.३) | of physicians |
| सान्निपातिके | सान्निपातिक (७.१) | in a critical condition |
| कर्मणि | कर्मन् (७.१) | in action |
| व्यज्यते | व्यज्यते (वि√अन्ज् भावकर्मणोः लट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | is revealed |
| प्रज्ञा | प्रज्ञा (१.१) | wisdom |
| स्वस्थे | स्वस्थ (७.१) | when healthy |
| कः | किम् (१.१) | who |
| वा | वा | indeed |
| न | न | not |
| पण्डितः | पण्डित (१.१) | wise |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| म | न्त्रि | णां | भि | न्न | स | न्धा | ने |
| भि | ष | जां | सा | न्नि | पा | ति | के |
| क | र्म | णि | व्य | ज्य | ते | प्र | ज्ञा |
| स्व | स्थे | को | वा | न | प | ण्डि | तः |
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