अन्वयः
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नृपः कौलीन्यात् न सौहार्दात् न वाक्ये प्रवर्तते। मन्त्रिणाम् वा-वत् अभ्येति व्यसनम् शोकम् एव च।
Summary
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A king does not act upon the advice of ministers out of respect for their noble birth or friendship; he only turns to them when overwhelmed by calamity or grief.
सारांश
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राजा कुलीनता या मित्रता के कारण मंत्रियों की सलाह नहीं मानता, वह केवल विपत्ति और शोक आने पर ही उनकी महत्ता समझता है।
पदच्छेदः
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| न | न | not |
| कौलीन्यात् | कौलीन्य (५.१) | from lineage |
| न | न | not |
| सौहार्दात् | सौहार्द (५.१) | from friendship |
| नृपः | नृप (१.१) | a king |
| वाक्ये | वाक्य (७.१) | in words/advice |
| प्रवर्तते | प्रवर्तते (√प्रवृत् कर्तरि लट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | acts |
| मन्त्रिणाम् | मन्त्रिन् (६.३) | of ministers |
| वा | वा | or |
| अवदत् | अवदत् (√वद्+शतृ, १.१) | not speaking/disregarding |
| अभ्येति | अभ्येति (√अभ्य्+इ कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | approaches/encounters |
| व्यसनम् | व्यसन (२.१) | misfortune |
| शोकम् | शोक (२.१) | sorrow |
| एव | एव | certainly |
| च | च | and |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| न | कौ | ली | न्या | न्न | सौ | हा | र्दा |
| न्नृ | पो | वा | क्ये | प्र | व | र्त | ते |
| म | न्त्रि | णां | वा | व | द | भ्ये | ति |
| व्य | स | नं | शो | क | मे | व | च |
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