अन्वयः
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यः नरः आत्मनः वृद्धिम् आयुष्यम् च सुखानि च इच्छेत्, सः प्राज्ञः बृहस्पतेः अपि विश्वासे न व्रजेत्।
Summary
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A wise person who desires growth, longevity, and happiness should not place absolute trust even in someone as knowledgeable as Bṛhaspati.
सारांश
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अपनी उन्नति, आयु और सुख चाहने वाले बुद्धिमान मनुष्य को साक्षात् बृहस्पति पर भी अत्यधिक विश्वास नहीं करना चाहिए।
पदच्छेदः
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| बृहस्पतेः | बृहस्पति (६.१) | of Brihaspati |
| अपि | अपि | even |
| प्राज्ञः | प्राज्ञ (१.१) | a wise person |
| न | न | not |
| विश्वासे | विश्वास (७.१) | in trust |
| व्रजेत् | व्रजेत् (√व्रज् कर्तरि विधिलिङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | should go |
| नरः | नर (१.१) | a man |
| यः | यद् (१.१) | who |
| इच्छेत् | इच्छेत् (√इष् कर्तरि विधिलिङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | desires |
| आत्मनः | आत्मन् (६.१) | one's own |
| वृद्धिम् | वृद्धि (२.१) | prosperity |
| आयुष्यम् | आयुष्य (२.१) | longevity |
| च | च | and |
| सुखानि | सुख (२.३) | happinesses |
| च | च | and |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| बृ | ह | स्प | ते | र | पि | प्रा | ज्ञो |
| न | वि | श्वा | से | व्र | जे | न्न | रः |
| य | इ | च्छे | दा | त्म | नो | वृ | द्धि |
| मा | यु | ष्यं | च | सु | खा | नि | च |
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