अन्वयः
AI
यः भृत्यः तु स्वामि-आदिष्टः समम् विषमम् एव च मन्यते, भूतिम् इच्छता भूभुजा सः न सन्धार्यः।
Summary
AI
A servant who evaluates his master's commands as either easy or difficult should not be retained by a king who desires prosperity.
सारांश
AI
जो सेवक स्वामी के उचित-अनुचित आदेशों में भेद करता है, अपनी उन्नति चाहने वाले राजा को उसे साथ नहीं रखना चाहिए।
पदच्छेदः
AI
| स्वाम्यादिष्टस्तु | स्वामिन्–आदिष्ट (√आदिश्+क्त, १.१)–तु | but one commanded by the master |
| यः | यद् (१.१) | who |
| भृत्यः | भृत्य (१.१) | servant |
| समम् | सम (२.१) | easy/equal |
| विषममेव | विषम (२.१)–एव | difficult indeed |
| च | च | and |
| मन्यते | मन्यते (√मन् कर्तरि लट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | considers |
| न | न | not |
| स | तद् (१.१) | that |
| सन्धार्यः | सन्धार्य (सम्√धृ+ण्यत्, १.१) | to be maintained |
| भूभुजा | भू–भुज् (३.१) | by a king |
| भूतिमिच्छता | भूति (२.१)–इच्छत् (√इष्+शतृ, ३.१) | by one desiring prosperity |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| स्वा | म्या | दि | ष्ट | स्तु | यो | भृ | त्यः |
| स | मं | वि | ष | म | मे | व | च |
| म | न्य | ते | न | स | स | न्धा | र्यो |
| भू | भु | जा | भू | ति | मि | च्छ | ता |
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.