अन्वयः
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शक्ति-वैकल्य-नम्रस्य निःसारत्वात् लघीयसः मान-हीनस्य जन्मिनः तृणस्य च समा गतिः।
Summary
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The fate of a person without self-respect, bowed by lack of power and made insignificant by worthlessness, is the same as that of a blade of grass.
सारांश
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शक्तिहीन होने के कारण झुकने वाले और आत्मसम्मान रहित मनुष्य की स्थिति तिनके के समान अत्यंत तुच्छ होती है।
पदच्छेदः
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| शक्तिवैकल्यनम्रस्य | शक्ति–वैकल्य–नम्र (६.१) | of one humbled by lack of power |
| निःसारत्वात् | निःसारत्व (५.१) | due to worthlessness |
| लघीयसः | लघीयस् (६.१) | of one more insignificant |
| जन्निमो | जन्मिन् (६.१) | of a born one/person |
| मानहीनस्य | मान–हीन (६.१) | of one devoid of honor |
| तृणस्य | तृण (६.१) | of grass |
| च | च | and |
| समा | सम (१.१) | same |
| गतिः | गति (१.१) | fate/state |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| श | क्ति | वै | क | ल्य | न | म्र | स्य |
| निः | सा | र | त्वा | ल्ल | घी | य | सः |
| ज | न्नि | मो | मा | न | ही | न | स्य |
| तृ | ण | स्य | च | स | मा | ग | तिः |
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