अन्वयः
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अति-उत्कटे च रौद्रे च शत्रौ प्राप्ते यस्य धैर्यं न हीयते, सः मही-नाथः पराभवम् न याति।
Summary
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A king whose courage does not fail even when confronted by a most powerful and fierce enemy never suffers defeat.
सारांश
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अत्यंत भयंकर शत्रु के सामने आने पर भी जो राजा अपना धैर्य नहीं छोड़ता, वह कभी पराजय का मुख नहीं देखता।
पदच्छेदः
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| अत्युत्कटे | अति–उत्कट (७.१) | very fierce |
| च | च | and |
| रौद्रे | रौद्र (७.१) | dreadful |
| च | च | and |
| शत्रौ | शत्रु (७.१) | against an enemy |
| प्राप्ते | प्राप्त (प्र√आप्+क्त, ७.१) | when encountered |
| न | न | not |
| हीयते | हीयते (√हा भावकर्मणोः लट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | is lost/diminished |
| धैर्यम् | धैर्य (१.१) | courage/fortitude |
| यस्य | यद् (६.१) | whose |
| महीनाथः | महीनाथ (१.१) | king |
| न | न | not |
| सः | तद् (१.१) | he |
| याति | याति (√या कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | goes/attains |
| पराभवम् | पराभव (२.१) | defeat |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| अ | त्यु | त्क | टे | च | रौ | द्रे | च |
| श | त्रौ | प्रा | प्ते | न | ही | य | ते |
| धै | र्यं | य | स्य | म | ही | ना | थो |
| न | स | या | ति | प | रा | भ | वम् |
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