दरिषु किञ्चित्स्वजनेषु किञ्चि-
द्गोप्यं वयस्येषु सुतेषु किञ्चित् ।
युक्तं न वा युक्तमिदं विचिन्त्य
वदेद्विपश्चिन्महतोऽनुरोधात् ॥
दरिषु किञ्चित्स्वजनेषु किञ्चि-
द्गोप्यं वयस्येषु सुतेषु किञ्चित् ।
युक्तं न वा युक्तमिदं विचिन्त्य
वदेद्विपश्चिन्महतोऽनुरोधात् ॥
द्गोप्यं वयस्येषु सुतेषु किञ्चित् ।
युक्तं न वा युक्तमिदं विचिन्त्य
वदेद्विपश्चिन्महतोऽनुरोधात् ॥
अन्वयः
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दारेषु किञ्चित्, स्व-जनेषु किञ्चित्, वयस्येषु किञ्चित्, सुतेषु च किञ्चित् गोप्यम्; विपश्चित् इदम् युक्तम् न वा युक्तम् इति विचिन्त्य महतः अनुरोधात् वदेत्।
Summary
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Some things should be hidden from wives, kin, friends, and sons. A wise person speaks only after considering what is appropriate or inappropriate, based on a great person's request.
सारांश
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पत्नी, स्वजन, मित्रों और पुत्रों से क्या कहना उचित है और क्या नहीं, इसका विचार करके ही विद्वान को परिस्थिति के अनुसार बोलना चाहिए।
पदच्छेदः
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| दरिषु | दरी (७.३) | among wives |
| किञ्चित् | किञ्चित् | a little/something |
| स्वजनेषु | स्वजन (७.३) | among one's own people |
| किञ्चित् | किञ्चित् | a little/something |
| गोप्यम् | गोप्य (√गुप्+ण्यत्, १.१) | to be kept secret |
| वयस्येषु | वयस्य (७.३) | among friends |
| सुतेषु | सुत (७.३) | among sons |
| किञ्चित् | किञ्चित् | a little/something |
| युक्तम् | युक्त (१.१) | proper |
| न | न | not |
| वा | वा | or |
| युक्तम् | युक्त (१.१) | proper |
| इदम् | इदम् (२.१) | this |
| विचिन्त्य | विचिन्त्य (वि√चिन्त्+ल्यप्) | having considered |
| वदेत् | वदेत् (√वद् कर्तरि विधिलिङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | should speak |
| विपश्चित् | विपश्चित् (१.१) | a wise person |
| महतः | महत् (५.१) | from a great (person/matter) |
| अनुरोधात् | अनुरोध (५.१) | out of consideration/request |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| द | रि | षु | कि | ञ्चि | त्स्व | ज | ने | षु | कि | ञ्चि |
| द्गो | प्यं | व | य | स्ये | षु | सु | ते | षु | कि | ञ्चित् |
| यु | क्तं | न | वा | यु | क्त | मि | दं | वि | चि | न्त्य |
| व | दे | द्वि | प | श्चि | न्म | ह | तो | ऽनु | रो | धात् |
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