अन्वयः
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ते दैत्याः तु तत्र तुष्टाः (सन्तः) पुनः पुनः साधयन्ति । ततः रुष्टाः देवाः च अपि नारदम् प्रत्यभाषन्त ।
Summary
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Those pleased Daityas repeatedly asserted their claim. Then, the angered gods also spoke in reply to Narada.
पदच्छेदः
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| ते | तद् (१.३) | those |
| तत्र | तत्र | there |
| तुष्टाः | तुष्ट (√तुष्+क्त, १.३) | pleased |
| दैत्याः | दैत्य (१.३) | Daityas |
| तु | तु | indeed |
| साधयन्ति | साधयन्ति (√साध् +णिच् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.) | asserted |
| पुनः | पुनर् | again |
| पुनः | पुनर् | and again |
| रुष्टाः | रुष्ट (√रुष्+क्त, १.३) | angered |
| च | च | and |
| अपि | अपि | also |
| ततः | ततः | then |
| देवाः | देव (१.३) | the gods |
| प्रत्यभाषन्त | प्रत्यभाषन्त (प्रति√भाष् कर्तरि लङ् (आत्मने.) प्र.पु. बहु.) | replied to |
| नारदम् | नारद (२.१) | Narada |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ते | त | त्र | तु | ष्टा | दै | त्या | स्तु |
| सा | ध | य | न्ति | पु | नः | पु | नः |
| रु | ष्टा | श्चा | पि | त | तो | दे | वाः |
| प्र | त्य | भा | ष | न्त | ना | र | दम् |
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