अन्वयः
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(यत्र पादः पृष्ठतः कुञ्चितः, वक्षः च समुन्नतम्), करः च तिलके स्थाप्यः, तत् निस्तम्भितम् उच्यते । (यत्र) पृष्ठतः वलितम् पादम् शिरः-घृष्टम् प्रसारयेत्, (तत् विद्युद्भ्रान्तम्) ।
Summary
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...and a hand is placed on the forehead mark ('tilaka'), that is called the 'Nistambhitam' karana. The next karana begins: where one should extend a foot that is turned backwards, so that it touches the head... (continued in the next verse).
पदच्छेदः
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| तिलके | तिलक (७.१) | on the forehead mark |
| च | च | and |
| करः | कर (१.१) | a hand |
| स्थाप्यः | स्थाप्य (√स्था+णिच्+ण्यत्, १.१) | is to be placed |
| तत् | तद् (१.१) | that |
| निस्तम्भितम् | निस्तम्भित (१.१) | Nistambhitam |
| उच्यते | उच्यते (√वच् भावकर्मणोः लट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | is called |
| पृष्ठतः | पृष्ठतस् | from behind |
| वलितम् | वलित (√वल्+क्त, २.१) | turned |
| पादम् | पाद (२.१) | foot |
| शिरः-घृष्टम् | शिरस्-घृष्टम् | so as to touch the head |
| प्रसारयेत् | प्रसारयेत् (प्र√सृ +णिच् कर्तरि विधिलिङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | one should extend |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ति | ल | के | च | क | रः | स्था | प्य |
| स्त | न्नि | स्त | म्भि | त | मु | च्य | ते |
| पृ | ष्ठ | तो | व | लि | तं | पा | दं |
| शि | रो | घृ | ष्टं | प्र | सा | र | येत् |
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