अन्वयः
AI
(यत्र पार्श्वक्रान्त-क्रमम् कृत्वा पुरस्तात् पातयेत्), हस्तौ प्रयोग-वश-गौ (भवतः), तत् पार्श्वक्रान्तम् उच्यते । (यत्र) पादः पृष्ठतः कुञ्चितः (भवति), वक्षः च एव समुन्नतम् (भवति), (तत् निस्तम्भितम्) ।
Summary
AI
...while the hands move according to the performance; this is called the 'Parshvakrantam' karana. The next karana begins: where the foot is bent backwards, and the chest is raised high... (continued in the next verse).
पदच्छेदः
AI
| प्रयोग-वश-गौ | प्रयोग–वश–ग (१.२) | moving according to the performance |
| हस्तौ | हस्त (१.२) | the two hands |
| पार्श्वक्रान्तम् | पार्श्वक्रान्त (१.१) | Parshvakrantam |
| तत् | तद् (१.१) | that |
| उच्यते | उच्यते (√वच् भावकर्मणोः लट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | is called |
| पृष्ठतः | पृष्ठतस् | backwards |
| कुञ्चितः | कुञ्चित (√कुञ्च्+क्त, १.१) | bent |
| पादः | पाद (१.१) | the foot |
| वक्षः | वक्षस् (१.१) | the chest |
| च | च | and |
| एव | एव | also |
| समुन्नतम् | समुन्नत (सम्+उद्√नम्+क्त, १.१) | is raised high |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| प्र | यो | ग | व | श | गौ | ह | स्तौ |
| पा | र्श्व | क्रा | न्तं | त | दु | च्य | ते |
| पृ | ष्ठ | तः | कु | ञ्चि | तः | पा | दौ |
| व | क्ष | श्चै | व | स | मु | न्न | तम् |
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.