अन्वयः
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इह मर्त्यानाम् यः (मण्डपः) भवेत्, (तम्) मण्डपम् दीर्घत्वेन चतुःषष्टि करान् कुर्यात्, विस्तारम् च द्वात्रिंशतम् (करान्) कुर्यात् ।
Summary
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For mortals, the playhouse (mandapa) should be made sixty-four hands in length and thirty-two hands in breadth.
पदच्छेदः
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| चतुःषष्टिकरान् | चतुःषष्टि–कर (२.३) | sixty-four hands |
| कुर्यात् | कुर्यात् (√कृ कर्तरि विधिलिङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | should make |
| दीर्घत्वेन | दीर्घत्व (३.१) | in length |
| तु | तु | but/and |
| मण्डपम् | मण्डप (२.१) | the pavilion |
| द्वात्रिंशतम् | द्वात्रिंशत् (२.१) | thirty-two |
| च | च | and |
| विस्तारम् | विस्तार (२.१) | in breadth |
| मर्त्यानाम् | मर्त्य (६.३) | of mortals |
| यः | यद् (१.१) | which |
| भवेत् | भवेत् (√भू कर्तरि विधिलिङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | may be |
| इह | इह | here (for mortals) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| च | तुः | ष | ष्टि | क | रा | न्कु | र्या |
| द्दी | र्घ | त्वे | न | तु | म | ण्ड | पम् |
| द्वा | त्रिं | श | तं | च | वि | स्ता | र |
| न्म | र्त्या | नां | यो | भ | वे | दि | ह |
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