अन्वयः
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ब्रह्मणा यत् वचनम् उदाहृतम्, तत् श्रुत्वा शक्रः प्राञ्जलिः प्रणतः भूत्वा पितामहम् प्रति उवाच ।
Summary
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Having heard those words which were spoken by Brahma, Shakra (Indra), with folded hands and bowing down, replied to Pitamaha (Brahma).
पदच्छेदः
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| तत् | तद् (२.१) | that |
| श्रुत्वा | श्रुत्वा (√श्रु+क्त्वा) | having heard |
| वचनम् | वचन (२.१) | word |
| शक्रः | शक्र (१.१) | Shakra (Indra) |
| ब्रह्मणा | ब्रह्मन् (३.१) | by Brahma |
| यत् | यद् (१.१) | which |
| उदाहृतम् | उदाहृत (उद्+आ√हृ+क्त, १.१) | was spoken |
| प्राञ्जलिः | प्राञ्जलि (१.१) | with folded hands |
| प्रणतः | प्रणत (प्र√नम्+क्त, १.१) | bowing down |
| भूत्वा | भूत्वा (√भू+क्त्वा) | having become |
| प्रत्युवाच | प्रत्युवाच (प्रति√वच् कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | replied |
| पितामहम् | पितामह (२.१) | to Pitamaha |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| त | च्छृ | त्वा | व | च | नं | श | क्रो |
| ब्र | ह्म | णा | य | दु | दा | हृ | तम् |
| प्रा | ञ्ज | लिः | प्र | ण | तो | भू | त्वा |
| प्र | त्यु | वा | च | पि | ता | म | हम् |
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