मदुग्रतापव्ययशक्तशीकरः
सुराः स वः केन पपे कृपार्णवः ।
उदेति कोटिर्न मुदे मदुत्तमा
किमाशु संकल्पकणश्रमेण वः ॥
मदुग्रतापव्ययशक्तशीकरः
सुराः स वः केन पपे कृपार्णवः ।
उदेति कोटिर्न मुदे मदुत्तमा
किमाशु संकल्पकणश्रमेण वः ॥
सुराः स वः केन पपे कृपार्णवः ।
उदेति कोटिर्न मुदे मदुत्तमा
किमाशु संकल्पकणश्रमेण वः ॥
अन्वयः
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सुराः ! मत्-उग्र-ताप-व्यय-शक्त-शीकरः सः कृपा-अर्णवः वः केन पपे? मत्-उत्तमा कोटिः मुदे न उदेति । वः आशु संकल्प-कण-श्रमेण किम्?
Summary
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O gods! By what was that ocean of your compassion drunk, of which even a single drop was capable of alleviating my fierce sorrow? The best thought for my joy does not arise. What is the use of your effort, which is but a particle of an intention, and that too, a fleeting one?
पदच्छेदः
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| मदुग्रतापव्ययशक्तशीकरः | मत्–उग्र–ताप–व्यय–शक्त–शीकर (१.१) | a drop capable of alleviating my fierce sorrow |
| सुराः | सुर (८.३) | O gods |
| सः | तद् (१.१) | that |
| वः | युष्मद् (६.३) | your |
| केन | किम् (३.१) | by what |
| पपे | पपे (√पा भावकर्मणोः लिट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | was drunk |
| कृपार्णवः | कृपा–अर्णव (१.१) | ocean of compassion |
| उदेति | उदेति (उद्√इ कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | arises |
| कोटिः | कोटि (१.१) | the highest thought |
| न | न | not |
| मुदे | मुद् (४.१) | for joy |
| मदुत्तमा | मत्–उत्तमा (१.१) | the best for me |
| किम् | किम् | what is the use |
| आशु | आशु | quickly |
| संकल्पकणश्रमेण | संकल्प–कण–श्रम (३.१) | by the effort of a particle of intention |
| वः | युष्मद् (६.३) | your |
छन्दः
वंशस्थम् [१२: जतजर]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| म | दु | ग्र | ता | प | व्य | य | श | क्त | शी | क | रः |
| सु | राः | स | वः | के | न | प | पे | कृ | पा | र्ण | वः |
| उ | दे | ति | को | टि | र्न | मु | दे | म | दु | त्त | मा |
| कि | मा | शु | सं | क | ल्प | क | ण | श्र | मे | ण | वः |
| ज | त | ज | र | ||||||||
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