त्वरस्व पञ्चेषुहुताशनात्मनः
तनुष्व मद्भस्ममयं यशश्चयम् ।
विधे परेहाफलभक्षणव्रती
पताद्य तृष्यन्नसुभिर्ममाफलैः ॥
त्वरस्व पञ्चेषुहुताशनात्मनः
तनुष्व मद्भस्ममयं यशश्चयम् ।
विधे परेहाफलभक्षणव्रती
पताद्य तृष्यन्नसुभिर्ममाफलैः ॥
तनुष्व मद्भस्ममयं यशश्चयम् ।
विधे परेहाफलभक्षणव्रती
पताद्य तृष्यन्नसुभिर्ममाफलैः ॥
अन्वयः
AI
पञ्च-इषु-हुत-आशन ! त्वरस्व । आत्मनः मत्-भस्म-मयम् यशः-चयम् तनुष्व । विधे ! पर-ईहा-फल-भक्षण-व्रती (त्वम्) अद्य मम अफलैः असुभिः तृष्यन् पत ।
Summary
AI
O fire of Kama, hurry! Spread your heap of fame made from my ashes. O Fate, you who are vowed to consume the fruits of others' efforts! Being thirsty, feed today on my fruitless life-breaths.
पदच्छेदः
AI
| त्वरस्व | त्वरस्व (√त्वर् कर्तरि लोट् (आत्मने.) म.पु. एक.) | hurry up |
| पञ्चेषुहुताशन | पञ्च-इषु–हुत-आशन (८.१) | O fire of Kama |
| आत्मनः | आत्मन् (६.१) | of yourself |
| तनुष्व | तनुष्व (√तन् कर्तरि लोट् (आत्मने.) म.पु. एक.) | spread |
| मद्भस्ममयं | मत्–भस्म–मय (२.१) | made of my ashes |
| यशश्चयम् | यशस्–चय (२.१) | a heap of fame |
| विधे | विधि (८.१) | O Fate |
| परेहाफलभक्षणव्रती | पर–ईहा–फल–भक्षण–व्रतिन् (१.१) | O you who are vowed to consume the fruits of others' efforts |
| पत | पत (√पत् कर्तरि लोट् (परस्मै.) म.पु. एक.) | feed on |
| अद्य | अद्य | today |
| तृष्यन् | तृष्यत् (√तृष्+शतृ, १.१) | being thirsty |
| असुभिः | असु (३.३) | with life-breaths |
| मम | अस्मद् (६.१) | my |
| अफलैः | अफल (३.३) | fruitless |
छन्दः
वंशस्थम् [१२: जतजर]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| त्व | र | स्व | प | ञ्चे | षु | हु | ता | श | ना | त्म | नः |
| त | नु | ष्व | म | द्भ | स्म | म | यं | य | श | श्च | यम् |
| वि | धे | प | रे | हा | फ | ल | भ | क्ष | ण | व्र | ती |
| प | ता | द्य | तृ | ष्य | न्न | सु | भि | र्म | मा | फ | लैः |
| ज | त | ज | र | ||||||||
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.