अथोद्भ्रमन्ती रुदती गतक्षमा
ससंभ्रमा लुप्तरतिः स्खलन्मतिः ।
व्यधात्प्रियप्राप्तिविधातनिश्चया-
न्मृदूनि दूना परिदेवतानि सा ॥
अथोद्भ्रमन्ती रुदती गतक्षमा
ससंभ्रमा लुप्तरतिः स्खलन्मतिः ।
व्यधात्प्रियप्राप्तिविधातनिश्चया-
न्मृदूनि दूना परिदेवतानि सा ॥
ससंभ्रमा लुप्तरतिः स्खलन्मतिः ।
व्यधात्प्रियप्राप्तिविधातनिश्चया-
न्मृदूनि दूना परिदेवतानि सा ॥
अन्वयः
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अथ प्रिय-प्राप्ति-विधात-निश्चयात् दूना, उद्भ्रमन्ती, रुदती, गत-क्षमा, स-संभ्रमा, लुप्त-रतिः, स्खलत्-मतिः सा मृदूनि परिदेवतानि व्यधात् ।
Summary
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Then, distressed by the certainty that her hope of attaining her beloved was destroyed, she—agitated, weeping, having lost her patience, joy, and with a faltering mind—uttered tender lamentations.
पदच्छेदः
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| अथ | अथ | then |
| उद्भ्रमन्ती | उद्भ्रमन्ती (उद्√भ्रम्+शतृ, १.१) | agitated |
| रुदती | रुदन्ती (√रुद्+शतृ, १.१) | weeping |
| गतक्षमा | गत (√गम्+क्त)–क्षमा (१.१) | one whose patience was gone |
| ससंभ्रमा | स–संभ्रम (१.१) | agitated |
| लुप्तरतिः | लुप्त (√लुप्+क्त)–रति (१.१) | one whose joy was lost |
| स्खलन्मतिः | स्खलत् (√स्खल्+शतृ)–मति (१.१) | one whose mind was faltering |
| व्यधात् | व्यधात् (वि√धा कर्तरि लुङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | she uttered |
| प्रियप्राप्तिविधातनिश्चयात् | प्रिय–प्राप्ति–विधात–निश्चय (५.१) | from the certainty of the destruction of attaining her beloved |
| मृदूनि | मृदु (२.३) | tender |
| दूना | दूना (√दू+क्त, १.१) | distressed |
| परिदेवतानि | परिदेवन (२.३) | lamentations |
| सा | तद् (१.१) | she |
छन्दः
वंशस्थम् [१२: जतजर]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| अ | थो | द्भ्र | म | न्ती | रु | द | ती | ग | त | क्ष | मा |
| स | सं | भ्र | मा | लु | प्त | र | तिः | स्ख | ल | न्म | तिः |
| व्य | धा | त्प्रि | य | प्रा | प्ति | वि | धा | त | नि | श्च | या |
| न्मृ | दू | नि | दू | ना | प | रि | दे | व | ता | नि | सा |
| ज | त | ज | र | ||||||||
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