स्फुटोत्पलाभ्यामलिदंपतीव
तद्विलोचनाभ्यां कुचकुङ्मलाशया ।
निपत्य बिन्दू हृदि कज्जलाविलौ
मणीव नीलौ तरलौ विरेजतुः ॥
स्फुटोत्पलाभ्यामलिदंपतीव
तद्विलोचनाभ्यां कुचकुङ्मलाशया ।
निपत्य बिन्दू हृदि कज्जलाविलौ
मणीव नीलौ तरलौ विरेजतुः ॥
तद्विलोचनाभ्यां कुचकुङ्मलाशया ।
निपत्य बिन्दू हृदि कज्जलाविलौ
मणीव नीलौ तरलौ विरेजतुः ॥
अन्वयः
AI
कुच-कुङ्मल-आशया स्फुट-उत्पलाभ्याम् अलि-दंपती इव तत्-विलोचनाभ्याम् निपत्य, कज्जल-आविलौ तरलौ नीलौ बिन्दू हृदि नीलौ मणी इव विरेजतुः ।
Summary
AI
Like a pair of bees leaving two bloomed lotuses, two teardrops, stained dark with collyrium, fell from her eyes. Hoping to reach her breast-buds, these trembling, dark drops fell upon her heart and shone like two blue sapphire gems.
पदच्छेदः
AI
| स्फुटोत्पलाभ्याम् | स्फुट–उत्पल (५.२) | from the two bloomed lotuses |
| अलिदंपतीव | अलि–दंपती–इव | like a pair of bees |
| तद्विलोचनाभ्याम् | तद्–विलोचन (५.२) | from her two eyes |
| कुचकुङ्मलाशया | कुच–कुङ्मल–आशया (३.१) | with the hope of reaching the breast-buds |
| निपत्य | निपत्य (नि√पत्+ल्यप्) | having fallen |
| बिन्दू | बिन्दु (१.२) | two drops |
| हृदि | हृद् (७.१) | on the heart |
| कज्जलाविलौ | कज्जल–आविल (१.२) | stained with collyrium |
| मणीव | मणि–इव | like two gems |
| नीलौ | नील (१.२) | blue |
| तरलौ | तरल (१.२) | trembling |
| विरेजतुः | विरेजतुः (वि√राज् कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. द्वि.) | shone |
छन्दः
वंशस्थम् [१२: जतजर]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| स्फु | टो | त्प | ला | भ्या | म | लि | दं | प | ती | व | त |
| द्वि | लो | च | ना | भ्यां | कु | च | कु | ङ्म | ला | श | या |
| नि | प | त्य | बि | न्दू | हृ | दि | क | ज्ज | ला | वि | लौ |
| म | णी | व | नी | लौ | त | र | लौ | वि | रे | ज | तुः |
| ज | त | ज | र | ||||||||
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.