अपः प्रति स्वामितयाऽपरः सुरः
स ता निषेधेद्यदि नैषधक्रुधा ।
नलाय लोभात्ततपाणयेऽपि ते
पिता कथं त्वां वद संप्रदास्यते ॥
अपः प्रति स्वामितयाऽपरः सुरः
स ता निषेधेद्यदि नैषधक्रुधा ।
नलाय लोभात्ततपाणयेऽपि ते
पिता कथं त्वां वद संप्रदास्यते ॥
स ता निषेधेद्यदि नैषधक्रुधा ।
नलाय लोभात्ततपाणयेऽपि ते
पिता कथं त्वां वद संप्रदास्यते ॥
अन्वयः
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यदि अपरः सुरः सः (वरुणः) नैषध-क्रुधा स्वामितया ताः अपः प्रति निषेधेत्, (तर्हि) ते पिता लोभात् नलाय तत-पाणये अपि त्वाम् कथम् संप्रदास्यते? वद ।
Summary
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If that other god, Varuna, out of anger towards Nala, were to forbid the use of waters due to his lordship over them, tell me, how will your father give you away in marriage to Nala, even with his hand outstretched in desire?
पदच्छेदः
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| अपः | अप् (२.३) | the waters |
| प्रति | प्रति | regarding |
| स्वामितया | स्वामिता (३.१) | due to his lordship |
| अपरः | अपर (१.१) | the other |
| सुरः | सुर (१.१) | god (Varuna) |
| सः | तद् (१.१) | he |
| ताः | तद् (२.३) | them (the waters) |
| निषेधेत् | निषेधेत् (नि√सिध् कर्तरि विधिलिङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | should he forbid |
| यदि | यदि | if |
| नैषधक्रुधा | नैषध–क्रुध् (३.१) | with anger towards Nala |
| नलाय | नल (४.१) | for Nala |
| लोभात् | लोभ (५.१) | out of desire |
| ततपाणये | तत (√तन्+क्त)–पाणि (४.१) | to him with an outstretched hand |
| अपि | अपि | even |
| ते | युष्मद् (६.१) | your |
| पिता | पितृ (१.१) | father |
| कथम् | कथम् | how |
| त्वाम् | युष्मद् (२.१) | you |
| वद | वद (√वद् कर्तरि लोट् (परस्मै.) म.पु. एक.) | tell |
| संप्रदास्यते | संप्रदास्यते (सम्+प्र√दा कर्तरि लृट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | will give away in marriage |
छन्दः
वंशस्थम् [१२: जतजर]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| अ | पः | प्र | ति | स्वा | मि | त | या | ऽप | रः | सु | रः |
| स | ता | नि | षे | धे | द्य | दि | नै | ष | ध | क्रु | धा |
| न | ला | य | लो | भा | त्त | त | पा | ण | ये | ऽपि | ते |
| पि | ता | क | थं | त्वां | व | द | सं | प्र | दा | स्य | ते |
| ज | त | ज | र | ||||||||
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