पतिंवरायाः कुलजं वरस्य वा
यमः कमप्याचरितातिथिं यदि ।
कथं न गन्ता विफलीभविष्णुतां
स्वयंवरः साध्वि समृद्धिमानपि ॥
पतिंवरायाः कुलजं वरस्य वा
यमः कमप्याचरितातिथिं यदि ।
कथं न गन्ता विफलीभविष्णुतां
स्वयंवरः साध्वि समृद्धिमानपि ॥
यमः कमप्याचरितातिथिं यदि ।
कथं न गन्ता विफलीभविष्णुतां
स्वयंवरः साध्वि समृद्धिमानपि ॥
अन्वयः
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साध्वि ! यदि यमः पतिंवरायाः (तव) वा कुलजम् वरस्य कम् अपि आचरित-अतिथिम् (करिष्यति), (तर्हि) समृद्धिमान् अपि स्वयंवरः कथम् विफलीभविष्णुताम् न गन्ता ?
Summary
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O virtuous one! If Yama (the god of death) makes either you, who are choosing a husband, or some high-born suitor his guest (i.e., causes their death), then how will this grand svayamvara, even with all its prosperity, not become fruitless?
पदच्छेदः
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| पतिंवरायाः | पतिंवरा (६.१) | of her who is choosing a husband |
| कुलजम् | कुलज (२.१) | a high-born one |
| वरस्य | वर (६.१) | of a suitor |
| वा | वा | or |
| यमः | यम (१.१) | Yama |
| कम् | किम् (२.१) | some |
| अपि | अपि | even |
| आचरितातिथिम् | आचरित (आ√चर्+क्त)–अतिथि (२.१) | one made a guest (of death) |
| यदि | यदि | if |
| कथम् | कथम् | how |
| न | न | not |
| गन्ता | गन्तृ (√गम्+तृच्, १.१) | will go |
| विफलीभविष्णुताम् | विफलीभविष्णुता (२.१) | to the state of becoming fruitless |
| स्वयंवरः | स्वयंवर (१.१) | the svayamvara |
| साध्वि | साध्वी (८.१) | O virtuous one |
| समृद्धिमान् | समृद्धिमत् (१.१) | prosperous |
| अपि | अपि | even |
छन्दः
वंशस्थम् [१२: जतजर]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| प | तिं | व | रा | याः | कु | ल | जं | व | र | स्य | वा |
| य | मः | क | म | प्या | च | रि | ता | ति | थिं | य | दि |
| क | थं | न | ग | न्ता | वि | फ | ली | भ | वि | ष्णु | तां |
| स्व | यं | व | रः | सा | ध्वि | स | मृ | द्धि | मा | न | पि |
| ज | त | ज | र | ||||||||
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