विभिन्दता दुष्कृतिनीं मम श्रुतिं
दिगिन्द्रदुर्वाचिकसूचिसंचयैः ।
प्रयातजीवामिव मां प्रति स्फुटं
कृतं त्वयाप्यन्तकदूततोचितम् ॥
विभिन्दता दुष्कृतिनीं मम श्रुतिं
दिगिन्द्रदुर्वाचिकसूचिसंचयैः ।
प्रयातजीवामिव मां प्रति स्फुटं
कृतं त्वयाप्यन्तकदूततोचितम् ॥
दिगिन्द्रदुर्वाचिकसूचिसंचयैः ।
प्रयातजीवामिव मां प्रति स्फुटं
कृतं त्वयाप्यन्तकदूततोचितम् ॥
अन्वयः
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दिक्-इन्द्र-दुर्वाचिक-सूचि-संचयैः दुष्कृतिनीम् मम श्रुतिम् विभिन्दता त्वया अपि प्रयात-जीवाम् इव माम् प्रति स्फुटम् अन्तक-दूतता-उचितम् कृतम् ।
Summary
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'By piercing my sinful ear with collections of needles that are the harsh words of the guardians of the quarters, you have clearly done something befitting a messenger of Yama (the god of death) towards me, who is as if her life has departed.'
पदच्छेदः
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| विभिन्दता | विभिन्दत् (वि√भिद्+शतृ, ३.१) | by (you) piercing |
| दुष्कृतिनीम् | दुष्कृतिन् (२.१) | sinful |
| मम | अस्मद् (६.१) | my |
| श्रुतिम् | श्रुति (२.१) | ear |
| दिक् | दिश् | of the quarters' |
| इन्द्र | इन्द्र | lords' |
| दुर्वाचिक | दुर्वाचिक | harsh words |
| सूचि | सूचि | needles |
| संचयैः | संचय (३.३) | with the collections of |
| प्रयात | प्रयात (प्र√या+क्त) | departed |
| जीवाम् | जीवा (२.१) | whose life |
| इव | इव | as if |
| माम् | अस्मद् (२.१) | me |
| प्रति | प्रति | towards |
| स्फुटम् | स्फुटम् | clearly |
| कृतम् | कृत (√कृ+क्त, १.१) | was done |
| त्वया | युष्मद् (३.१) | by you |
| अपि | अपि | also |
| अन्तक | अन्तक | of Yama |
| दूतता | दूतता | the state of being a messenger |
| उचितम् | उचित (१.१) | befitting |
छन्दः
वंशस्थम् [१२: जतजर]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| वि | भि | न्द | ता | दु | ष्कृ | ति | नीं | म | म | श्रु | तिं |
| दि | गि | न्द्र | दु | र्वा | चि | क | सू | चि | सं | च | यैः |
| प्र | या | त | जी | वा | मि | व | मां | प्र | ति | स्फु | टं |
| कृ | तं | त्व | या | प्य | न्त | क | दू | त | तो | चि | तम् |
| ज | त | ज | र | ||||||||
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