शिरीषमृद्वी वरुणं किमीहसे
पयः प्रकृत्या मृदुवर्गवासवम् ।
विहाय सर्वान्वृणुते स्म किं न सा
निशापि शीतांशुमनेन हेतुना ॥
शिरीषमृद्वी वरुणं किमीहसे
पयः प्रकृत्या मृदुवर्गवासवम् ।
विहाय सर्वान्वृणुते स्म किं न सा
निशापि शीतांशुमनेन हेतुना ॥
पयः प्रकृत्या मृदुवर्गवासवम् ।
विहाय सर्वान्वृणुते स्म किं न सा
निशापि शीतांशुमनेन हेतुना ॥
अन्वयः
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(अथवा) शिरीष-मृद्वी (त्वं) वरुणम् किम् ईहसे ? (यः) प्रकृत्या पयः (अस्ति), मृदु-वर्ग-वासवम् (च अस्ति) । अनेन हेतुना एव सा निशा अपि सर्वान् विहाय शीत-अंशुं न वृणुते स्म किम् ?
Summary
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Or is it Varuna you desire, you who are as delicate as a Shirisha flower? He is water by nature and the very chief of all soft things. Was it not for this very reason of compatibility that Night herself, abandoning all others, chose the cool-rayed Moon as her beloved?
पदच्छेदः
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| शिरीषमृद्वी | शिरीष–मृद्वी (१.१) | as delicate as a Shirisha flower |
| वरुणं | वरुण (२.१) | Varuna |
| किम् | किम् | why |
| ईहसे | ईहसे (√ईह् कर्तरि लट् (आत्मने.) म.पु. एक.) | do you desire |
| पयः | पयस् (१.१) | water |
| प्रकृत्या | प्रकृति (३.१) | by nature |
| मृदुवर्गवासवम् | मृदु–वर्ग–वासव (२.१) | the Indra (chief) of the class of soft things |
| विहाय | विहाय (वि√हा+ल्यप्) | having left |
| सर्वान् | सर्व (२.३) | all |
| वृणुते | वृणुते (√वृ कर्तरि लट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | chose |
| स्म | स्म | (makes past tense) |
| किं | किम् | (question particle) |
| न | न | not |
| सा | तद् (१.१) | that |
| निशा | निशा (१.१) | Night |
| अपि | अपि | also |
| शीतांशुम् | शीत–अंशु (२.१) | the cool-rayed one (the Moon) |
| अनेन | इदम् (३.१) | by this |
| हेतुना | हेतु (३.१) | reason |
छन्दः
वंशस्थम् [१२: जतजर]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| शि | री | ष | मृ | द्वी | व | रु | णं | कि | मी | ह | से |
| प | यः | प्र | कृ | त्या | मृ | दु | व | र्ग | वा | स | वम् |
| वि | हा | य | स | र्वा | न्वृ | णु | ते | स्म | किं | न | सा |
| नि | शा | पि | शी | तां | शु | म | ने | न | हे | तु | ना |
| ज | त | ज | र | ||||||||
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