करिष्यसे यद्यत एव दूषणात्
उपायमन्यं विदुषी स्वमृत्यवे ।
प्रियातिथिः स्वेन गृहागता कथं
न धर्मराजं चरितार्थयिष्यसि ॥
करिष्यसे यद्यत एव दूषणात्
उपायमन्यं विदुषी स्वमृत्यवे ।
प्रियातिथिः स्वेन गृहागता कथं
न धर्मराजं चरितार्थयिष्यसि ॥
उपायमन्यं विदुषी स्वमृत्यवे ।
प्रियातिथिः स्वेन गृहागता कथं
न धर्मराजं चरितार्थयिष्यसि ॥
अन्वयः
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विदुषी ! यदि अतः एव दूषणात् स्व-मृत्यवे अन्यम् उपायं करिष्यसे, (तर्हि) स्वेन गृह-आगता प्रिय-अतिथिः (त्वं) कथं न धर्मराजं चरितार्थयिष्यसि ?
Summary
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O wise lady (ironic)! If, due to this very fault of rejecting us, you employ some other means for your own death, how will you not gratify Yama, having come to his home of your own accord as a dear guest?
पदच्छेदः
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| करिष्यसे | करिष्यसे (√कृ कर्तरि लृट् (आत्मने.) म.पु. एक.) | you will make |
| यदि | यदि | if |
| अतः | अतः | from this |
| एव | एव | very |
| दूषणात् | दूषण (५.१) | due to the fault |
| उपायम् | उपाय (२.१) | means |
| अन्यं | अन्य (२.१) | another |
| विदुषी | विद्वस् (१.१) | O wise woman |
| स्वमृत्यवे | स्व–मृत्यु (४.१) | for your own death |
| प्रियातिथिः | प्रिय–अतिथि (१.१) | a dear guest |
| स्वेन | स्व (३.१) | by your own will |
| गृहागता | गृह–आगत (आ√गम्+क्त, १.१) | come to his home |
| कथं | कथम् | how |
| न | न | not |
| धर्मराजं | धर्मराज (२.१) | Dharmaraja (Yama) |
| चरितार्थयिष्यसि | चरितार्थयिष्यसि (√चरितार्थय कर्तरि लृट् (परस्मै.) म.पु. एक.) | you will gratify |
छन्दः
वंशस्थम् [१२: जतजर]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| क | रि | ष्य | से | य | द्य | त | ए | व | दू | ष | णा |
| तु | पा | य | म | न्यं | वि | दु | षी | स्व | मृ | त्य | वे |
| प्रि | या | ति | थिः | स्वे | न | गृ | हा | ग | ता | क | थं |
| न | ध | र्म | रा | जं | च | रि | ता | र्थ | यि | ष्य | सि |
| ज | त | ज | र | ||||||||
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