दिवौकसं कामयते न मानवी
नवीनमश्रावि तवाननादिदम् ।
कथं न वा दुर्ग्रहदोष एष ते
हितेन सम्यग्गुरुणापि शाम्यते ॥
दिवौकसं कामयते न मानवी
नवीनमश्रावि तवाननादिदम् ।
कथं न वा दुर्ग्रहदोष एष ते
हितेन सम्यग्गुरुणापि शाम्यते ॥
नवीनमश्रावि तवाननादिदम् ।
कथं न वा दुर्ग्रहदोष एष ते
हितेन सम्यग्गुरुणापि शाम्यते ॥
अन्वयः
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मानवी दिवौकसं न कामयते, इदं नवीनं तव आननात् अश्रावि । वा कथं ते एषः दुर्ग्रह-दोषः सम्यक् हितेन गुरुणा अपि न शाम्यते ?
Summary
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'A human woman does not desire a celestial being'—this unprecedented statement has been heard from your mouth. Otherwise, why is this fault of your stubbornness not being pacified even by sound and weighty beneficial advice?
पदच्छेदः
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| दिवौकसं | दिवौकस् (२.१) | a celestial being |
| कामयते | कामयते (√कम् +णिच् कर्तरि लट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | desires |
| न | न | not |
| मानवी | मानवी (१.१) | a human woman |
| नवीनम् | नवीन (१.१) | new/unprecedented |
| अश्रावि | अश्रावि (√श्रु भावकर्मणोः लुङ् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | was heard |
| तव | युष्मद् (६.१) | your |
| आननात् | आनन (५.१) | from the mouth |
| इदम् | इदम् (१.१) | this |
| कथम् | कथम् | why |
| न | न | not |
| वा | वा | or |
| दुर्ग्रहदोषः | दुर्ग्रह–दोष (१.१) | the fault of stubbornness |
| एषः | एतद् (१.१) | this |
| ते | युष्मद् (६.१) | your |
| हितेन | हित (३.१) | by beneficial (advice) |
| सम्यक् | सम्यञ्च् | properly |
| गुरुणा | गुरु (३.१) | by weighty |
| अपि | अपि | even |
| शाम्यते | शाम्यते (√शम् भावकर्मणोः लट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | is pacified |
छन्दः
वंशस्थम् [१२: जतजर]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| दि | वौ | क | सं | का | म | य | ते | न | मा | न | वी |
| न | वी | न | म | श्रा | वि | त | वा | न | ना | दि | दम् |
| क | थं | न | वा | दु | र्ग्र | ह | दो | ष | ए | ष | ते |
| हि | ते | न | स | म्य | ग्गु | रु | णा | पि | शा | म्य | ते |
| ज | त | ज | र | ||||||||
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