अपि द्रढीयः शृणु मत्प्रतिश्रुतं
स पीडयेत्पाणिमिमं न चेन्नृपः ।
हुताशनोद्बन्धनवारिकारितां
निजायुषस्तत्करवै स्ववैरिताम् ॥
अपि द्रढीयः शृणु मत्प्रतिश्रुतं
स पीडयेत्पाणिमिमं न चेन्नृपः ।
हुताशनोद्बन्धनवारिकारितां
निजायुषस्तत्करवै स्ववैरिताम् ॥
स पीडयेत्पाणिमिमं न चेन्नृपः ।
हुताशनोद्बन्धनवारिकारितां
निजायुषस्तत्करवै स्ववैरिताम् ॥
अन्वयः
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अपि द्रढीयः मत्-प्रतिश्रुतम् शृणु। चेत् सः नृपः इमम् पाणिम् न पीडयेत्, तत् निज-आयुषः हुत-अशन-उद्बन्धन-वारि-कारिताम् स्व-वैरिताम् करवै।
Summary
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'Also, listen to my firm promise: If that king (Nala) does not take this hand of mine, then I shall make my own life an enemy to myself, causing its end by fire, hanging, or water.'
पदच्छेदः
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| अपि | अपि | Also |
| द्रढीयः | दृढ (+ईयसुन्, २.१) | a firmer |
| शृणु | शृणु (√श्रु कर्तरि लोट् (परस्मै.) म.पु. एक.) | listen to |
| मत्-प्रतिश्रुतम् | मत्–प्रतिश्रुत (२.१) | my promise |
| सः | तद् (१.१) | that |
| पीडयेत् | पीडयेत् (√पीड् कर्तरि विधिलिङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | should take |
| पाणिम् | पाणि (२.१) | hand |
| इमम् | इदम् (२.१) | this |
| न | न | not |
| चेत् | चेद् | if |
| नृपः | नृप (१.१) | king (Nala) |
| हुत-अशन-उद्बन्धन-वारि-कारिताम् | हुताशन–उद्बन्धन–वारि–कारिता (२.१) | the state of being ended by fire, hanging, or water |
| निज-आयुषः | निज–आयुस् (६.१) | of my own life |
| तत् | तद् | then |
| करवै | करवै (√कृ कर्तरि लट् (आत्मने.) उ.पु. एक.) | I shall make |
| स्व-वैरिताम् | स्व–वैरिता (२.१) | an enemy to myself |
छन्दः
वंशस्थम् [१२: जतजर]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| अ | पि | द्र | ढी | यः | शृ | णु | म | त्प्र | ति | श्रु | तं |
| स | पी | ड | ये | त्पा | णि | मि | मं | न | चे | न्नृ | पः |
| हु | ता | श | नो | द्ब | न्ध | न | वा | रि | का | रि | तां |
| नि | जा | यु | ष | स्त | त्क | र | वै | स्व | वै | रि | ताम् |
| ज | त | ज | र | ||||||||
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