अपि स्वमस्वप्नमसूषुपन्नमी
परस्य दाराननवैतुमेव माम् ।
स्वयं दुरध्वार्णवनाविकाः कथं
स्पृशन्तु विज्ञाय हृदापि तादृशीम् ॥
अपि स्वमस्वप्नमसूषुपन्नमी
परस्य दाराननवैतुमेव माम् ।
स्वयं दुरध्वार्णवनाविकाः कथं
स्पृशन्तु विज्ञाय हृदापि तादृशीम् ॥
परस्य दाराननवैतुमेव माम् ।
स्वयं दुरध्वार्णवनाविकाः कथं
स्पृशन्तु विज्ञाय हृदापि तादृशीम् ॥
अन्वयः
AI
अमी माम् परस्य दारान् अनवैतुम् एव स्वम् अस्वप्नम् असूषुपन् अपि। स्वयम् दुरध्व-अर्णव-नाविकाः (सन्तः) तादृशीम् (माम्) विज्ञाय हृदा अपि कथम् स्पृशन्तु?
Summary
AI
'Perhaps these gods endured their own sleeplessness only to avoid knowing me as another's wife. Being themselves pilots on the ocean of righteousness, how can they, knowing me to be so devoted, touch me even with their heart?'
पदच्छेदः
AI
| अपि | अपि | Perhaps |
| स्वम् | स्व (२.१) | their own |
| अस्वप्नम् | अस्वप्न (२.१) | sleeplessness |
| असूषुपन् | असूषुपन् (√स्वप् +णिच् कर्तरि लुङ् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.) | they endured |
| अमी | अदस् (१.३) | these (gods) |
| परस्य | पर (६.१) | of another |
| दारान् | दारा (२.३) | as the wife |
| अनवैतुम् | अनवैतुम् (अव√इ+तुमुन्) | not to know |
| एव | एव | only |
| माम् | अस्मद् (२.१) | me |
| स्वयम् | स्वयम् | Themselves |
| दुरध्व-अर्णव-नाविकाः | दुरध्व–अर्णव–नाविक (१.३) | pilots on the ocean of the wrong path |
| कथम् | कथम् | how |
| स्पृशन्तु | स्पृशन्तु (√स्पृश् कर्तरि लोट् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.) | can they touch |
| विज्ञाय | विज्ञाय (वि√ज्ञा+ल्यप्) | having known |
| हृदा | हृद् (३.१) | with the heart |
| अपि | अपि | even |
| तादृशीम् | तादृशी (२.१) | such a one (as me) |
छन्दः
वंशस्थम् [१२: जतजर]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| अ | पि | स्व | म | स्व | प्न | म | सू | षु | प | न्न | मी |
| प | र | स्य | दा | रा | न | न | वै | तु | मे | व | माम् |
| स्व | यं | दु | र | ध्वा | र्ण | व | ना | वि | काः | क | थं |
| स्पृ | श | न्तु | वि | ज्ञा | य | हृ | दा | पि | ता | दृ | शीम् |
| ज | त | ज | र | ||||||||
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.