मयाङ्ग पृष्टः कुलनामनी भवान्
अमू विमुच्यैव किमन्यदुक्तवान् ।
न मह्यमत्रोत्तरधारयस्य किं
ह्रियेऽपि सेयं भवतोऽधमर्णता ॥
मयाङ्ग पृष्टः कुलनामनी भवान्
अमू विमुच्यैव किमन्यदुक्तवान् ।
न मह्यमत्रोत्तरधारयस्य किं
ह्रियेऽपि सेयं भवतोऽधमर्णता ॥
अमू विमुच्यैव किमन्यदुक्तवान् ।
न मह्यमत्रोत्तरधारयस्य किं
ह्रियेऽपि सेयं भवतोऽधमर्णता ॥
अन्वयः
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अङ्ग! मया भवान् कुलनामनी पृष्टः। (भवान्) अमू विमुच्य एव किम् अन्यत् उक्तवान्? किं मह्यम् अत्र न उत्तरधारयसि? इयं सा भवतः ह्रिये अपि अधमर्णता (अस्ति)।
Summary
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"O dear sir! I asked you for your lineage and name. Why have you said something else, completely avoiding these two? Do you not owe me an answer in this matter? This indebtedness of yours is a cause for shame as well."
पदच्छेदः
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| मया | अस्मद् (३.१) | by me |
| अङ्ग | अङ्ग (८.१) | O dear sir |
| पृष्टः | पृष्ट (√प्रछ्+क्त, १.१) | were asked |
| कुलनामनी | कुलनामन् (२.२) | lineage and name |
| भवान् | भवत् (१.१) | you |
| अमू | अदस् (२.२) | these two |
| विमुच्य | विमुच्य (वि√मुच्+ल्यप्) | having avoided |
| एव | एव | completely |
| किम् | किम् | why |
| अन्यत् | अन्यद् (२.१) | something else |
| उक्तवान् | उक्तवत् (√वच्+क्तवतु, १.१) | have you said |
| न | न | not |
| मह्यम् | अस्मद् (४.१) | to me |
| अत्र | अत्र | in this matter |
| उत्तरधारयसि | उत्तरधारयसि (उत्तर√धृ +णिच् कर्तरि लट् (परस्मै.) म.पु. एक.) | do you owe an answer |
| किम् | किम् | do |
| ह्रिये | ह्री (४.१) | for shame |
| अपि | अपि | also |
| सा | तद् (१.१) | that |
| इयम् | इदम् (१.१) | this |
| भवतः | भवत् (६.१) | your |
| अधमर्णता | अधमर्णता (१.१) | indebtedness |
छन्दः
वंशस्थम् [१२: जतजर]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| म | या | ङ्ग | पृ | ष्टः | कु | ल | ना | म | नी | भ | वा |
| न | मू | वि | मु | च्यै | व | कि | म | न्य | दु | क्त | वान् |
| न | म | ह्य | म | त्रो | त्त | र | धा | र | य | स्य | किं |
| ह्रि | ये | ऽपि | से | यं | भ | व | तो | ऽध | म | र्ण | ता |
| ज | त | ज | र | ||||||||
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