तदर्पितामश्रुतवद्विधाय तां
दिगीशसंदेशमयीं सरस्वतीम् ।
इदं तमुर्वीतलशीतलद्युतिं
जगाद वैदर्भनरेन्द्रनन्दिनी ॥
तदर्पितामश्रुतवद्विधाय तां
दिगीशसंदेशमयीं सरस्वतीम् ।
इदं तमुर्वीतलशीतलद्युतिं
जगाद वैदर्भनरेन्द्रनन्दिनी ॥
दिगीशसंदेशमयीं सरस्वतीम् ।
इदं तमुर्वीतलशीतलद्युतिं
जगाद वैदर्भनरेन्द्रनन्दिनी ॥
अन्वयः
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वैदर्भनरेन्द्रनन्दिनी तद्-अर्पितां तां दिगीश-संदेश-मयीं सरस्वतीम् अश्रुतवत् विधाय, तम् उर्वीतल-शीतलद्युतिम् इदं जगाद।
Summary
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The daughter of the king of Vidarbha (Damayanti), treating that speech full of the directional lords' messages delivered by him (Nala) as if unheard, spoke thus to him, who was like the moon on the surface of the earth.
पदच्छेदः
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| तदर्पिताम् | तद्–अर्पिता (२.१) | delivered by him |
| अश्रुतवत् | अश्रुतवत् | as if unheard |
| विधाय | विधाय (वि√धा+ल्यप्) | having treated |
| ताम् | तद् (२.१) | that |
| दिगीशसंदेशमयीम् | दिगीश–संदेश–मयी (२.१) | full of the messages of the directional lords |
| सरस्वतीम् | सरस्वती (२.१) | speech |
| इदम् | इदम् (२.१) | this |
| तम् | तद् (२.१) | to him |
| उर्वीतलशीतलद्युतिम् | उर्वीतल–शीतलद्युति (२.१) | who was like the moon on the earth's surface |
| जगाद | जगाद (√गद् कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | spoke |
| वैदर्भनरेन्द्रनन्दिनी | वैदर्भ–नरेन्द्र–नन्दिनी (१.१) | the daughter of the king of Vidarbha |
छन्दः
वंशस्थम् [१२: जतजर]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| त | द | र्पि | ता | म | श्रु | त | व | द्वि | धा | य | तां |
| दि | गी | श | सं | दे | श | म | यीं | स | र | स्व | तीम् |
| इ | दं | त | मु | र्वी | त | ल | शी | त | ल | द्यु | तिं |
| ज | गा | द | वै | द | र्भ | न | रे | न्द्र | न | न्दि | नी |
| ज | त | ज | र | ||||||||
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