पुरः सुरीणां भण केव मानवी
न यत्र तास्तत्र तु शोभिकापि सा ।
अकाञ्चनेऽकिंचन नायिकाङ्गके
किमारकूटाभरणेन न श्रियः ॥
पुरः सुरीणां भण केव मानवी
न यत्र तास्तत्र तु शोभिकापि सा ।
अकाञ्चनेऽकिंचन नायिकाङ्गके
किमारकूटाभरणेन न श्रियः ॥
न यत्र तास्तत्र तु शोभिकापि सा ।
अकाञ्चनेऽकिंचन नायिकाङ्गके
किमारकूटाभरणेन न श्रियः ॥
अन्वयः
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सुरीणाम् पुरः मानवी का इव (अस्ति), भण। यत्र ताः न (सन्ति), तत्र तु सा शोभिका अपि (भवति)। अकिञ्चन, अकाञ्चने नायिका-अङ्गके आरकूट-आभरणेन श्रियः किम् न (भवन्ति)?
Summary
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'Tell me, what is a mortal woman in the presence of celestial nymphs? However, where they are absent, she too can be considered beautiful. On a heroine's otherwise unadorned body, does not even an ornament of brass produce beauty?'
पदच्छेदः
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| पुरः | पुरस् | Before |
| सुरीणाम् | सुरी (६.३) | the celestial women |
| भण | भण (√भण् कर्तरि लोट् (परस्मै.) म.पु. एक.) | tell me |
| का | किम् (१.१) | what |
| इव | इव | indeed |
| मानवी | मानवी (१.१) | is a mortal woman |
| न | न | not |
| यत्र | यत्र | where |
| ताः | तद् (१.३) | they (are) |
| तत्र | तत्र | there |
| तु | तु | but |
| शोभिका | शोभिका (१.१) | beautiful |
| अपि | अपि | also |
| सा | तद् (१.१) | she (is) |
| अकाञ्चने | अकाञ्चन (७.१) | devoid of gold |
| अकिञ्चन | अकिञ्चन (८.१) | O poor one |
| नायिका-अङ्गके | नायिका–अङ्गक (७.१) | on a heroine's body |
| किम् | किम् | what |
| आरकूट-आभरणेन | आरकूट–आभरण (३.१) | with an ornament of brass |
| न | न | not |
| श्रियः | श्री (१.३) | are there beauties |
छन्दः
वंशस्थम् [१२: जतजर]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| पु | रः | सु | री | णां | भ | ण | के | व | मा | न | वी |
| न | य | त्र | ता | स्त | त्र | तु | शो | भि | का | पि | सा |
| अ | का | ञ्च | ने | ऽकिं | च | न | ना | यि | का | ङ्ग | के |
| कि | मा | र | कू | टा | भ | र | णे | न | न | श्रि | यः |
| ज | त | ज | र | ||||||||
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