वृथापरीहास इति प्रगल्भता
न नेति च त्वादृशि वाग्विगर्हणा ।
भवत्यवज्ञा च भवत्यनुत्तरात्
अतः प्रदित्सुः प्रतिवाचमस्मि ते ॥
वृथापरीहास इति प्रगल्भता
न नेति च त्वादृशि वाग्विगर्हणा ।
भवत्यवज्ञा च भवत्यनुत्तरात्
अतः प्रदित्सुः प्रतिवाचमस्मि ते ॥
न नेति च त्वादृशि वाग्विगर्हणा ।
भवत्यवज्ञा च भवत्यनुत्तरात्
अतः प्रदित्सुः प्रतिवाचमस्मि ते ॥
अन्वयः
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(यदि वदामि) 'वृथा-परीहासः' इति, (तर्हि सा) प्रगल्भता (भवति)। 'न न' इति च (वदामि चेत्), त्वादृशि (विषये सा) वाक्-विगर्हणा (भवति)। अनुत्तरात् अवज्ञा च भवति। अतः ते प्रति-वाचम् प्रदित्सुः अस्मि।
Summary
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Damayanti begins to speak: 'To say, "This is a pointless joke," would be impertinence. To say, "No, no," to one like you would be a self-reproach. And not answering at all would be disrespect. Therefore, I wish to give you a reply.'
पदच्छेदः
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| वृथा-परीहासः | वृथा–परीहास (१.१) | a pointless joke |
| इति | इति | thus |
| प्रगल्भता | प्रगल्भता (१.१) | impertinence |
| न | न | not |
| न | न | not |
| इति | इति | thus |
| च | च | and |
| त्वादृशि | त्वादृश् (७.१) | towards one like you |
| वाक्-विगर्हणा | वाच्–विगर्हणा (१.१) | a censure of speech |
| भवति | भवति (√भू कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | it becomes |
| अवज्ञा | अवज्ञा (१.१) | disrespect |
| च | च | and |
| भवति | भवति (√भू कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | it becomes |
| अनुत्तरात् | अनुत्तर (५.१) | from not answering |
| अतः | अतः | therefore |
| प्रदित्सुः | प्रदित्सु (प्र√दा+सन्+उ, १.१) | desirous of giving |
| प्रति-वाचम् | प्रति-वाच् (२.१) | a reply |
| अस्मि | अस्मि (√अस् कर्तरि लट् (परस्मै.) उ.पु. एक.) | I am |
| ते | युष्मद् (४.१) | to you |
छन्दः
वंशस्थम् [१२: जतजर]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| वृ | था | प | री | हा | स | इ | ति | प्र | ग | ल्भ | ता |
| न | ने | ति | च | त्वा | दृ | शि | वा | ग्वि | ग | र्ह | णा |
| भ | व | त्य | व | ज्ञा | च | भ | व | त्य | नु | त्त | रा |
| त | तः | प्र | दि | त्सुः | प्र | ति | वा | च | म | स्मि | ते |
| ज | त | ज | र | ||||||||
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