इयच्चिरस्यावदधन्ति मत्पथे
किमिन्द्रनेत्राण्यशनिर्न निर्ममौ ।
धिगस्तु मां सत्वरकार्यमन्थरं
स्थितः परप्रेष्यगुणोऽपि यत्र न ॥
इयच्चिरस्यावदधन्ति मत्पथे
किमिन्द्रनेत्राण्यशनिर्न निर्ममौ ।
धिगस्तु मां सत्वरकार्यमन्थरं
स्थितः परप्रेष्यगुणोऽपि यत्र न ॥
किमिन्द्रनेत्राण्यशनिर्न निर्ममौ ।
धिगस्तु मां सत्वरकार्यमन्थरं
स्थितः परप्रेष्यगुणोऽपि यत्र न ॥
अन्वयः
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इन्द्र-नेत्राणि मत्-पथे इयत्-चिरस्य किम् अवदधन्ति? अशनिः न निर्ममौ? यत्र पर-प्रेष्य-गुणः अपि न स्थितः, (तम्) सत्वर-कार्य-मन्थरम् माम् धिक् अस्तु।
Summary
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Nala continues his lament: 'Why are the gods (Indra's eyes) watching my path for so long? Why has the thunderbolt not been fashioned against me? Shame on me, who is slow in this urgent task, in whom not even the basic quality of a messenger is present.'
पदच्छेदः
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| इयत्-चिरस्य | इयत्–चिर (६.१) | for so long |
| अवदधन्ति | अवदधन्ति (अव√धा कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.) | are they paying attention |
| मत्-पथे | मत्–पथिन् (७.१) | on my path |
| किम् | किम् | why |
| इन्द्र-नेत्राणि | इन्द्र–नेत्र (१.३) | Indra's eyes (the gods) |
| अशनिः | अशनि (१.१) | the thunderbolt |
| न | न | not |
| निर्ममौ | निर्ममौ (निर्√मा कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | did fashion |
| धिक् | धिक् | shame on |
| अस्तु | अस्तु (√अस् कर्तरि लोट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | let there be |
| माम् | अस्मद् (२.१) | me |
| सत्वर-कार्य-मन्थरम् | सत्वर–कार्य–मन्थर (२.१) | who is slow in an urgent task |
| स्थितः | स्थित (√स्था+क्त, १.१) | is present |
| पर-प्रेष्य-गुणः | पर–प्रेष्य–गुण (१.१) | the quality of a messenger |
| अपि | अपि | even |
| यत्र | यत्र | in whom |
| न | न | not |
छन्दः
वंशस्थम् [१२: जतजर]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| इ | य | च्चि | र | स्या | व | द | ध | न्ति | म | त्प | थे |
| कि | मि | न्द्र | ने | त्रा | ण्य | श | नि | र्न | नि | र्म | मौ |
| धि | ग | स्तु | मां | स | त्व | र | का | र्य | म | न्थ | रं |
| स्थि | तः | प | र | प्रे | ष्य | गु | णो | ऽपि | य | त्र | न |
| ज | त | ज | र | ||||||||
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