मयापि देयं प्रतिवाचिकं न ते
स्वनाम मत्कर्णसुधामकुर्वते ।
परेण पुंसा हि ममापि संकथा
कुलाबलाचारसहासनासहा ॥
मयापि देयं प्रतिवाचिकं न ते
स्वनाम मत्कर्णसुधामकुर्वते ।
परेण पुंसा हि ममापि संकथा
कुलाबलाचारसहासनासहा ॥
स्वनाम मत्कर्णसुधामकुर्वते ।
परेण पुंसा हि ममापि संकथा
कुलाबलाचारसहासनासहा ॥
अन्वयः
AI
स्वनाम मत्-कर्ण-सुधाम् अकुर्वते ते मया अपि प्रतिवाचिकं न देयम्। हि परेण पुंसा मम संकथा अपि कुल-अबला-आचार-सह-आसन-असहा (अस्ति)।
Summary
AI
"I too shall not give a reply to you, who do not make your name nectar for my ears. Indeed, for me, even conversation with another man is as intolerable as sharing a seat, according to the customs of women from noble families."
पदच्छेदः
AI
| मया | अस्मद् (३.१) | by me |
| अपि | अपि | also |
| देयम् | देय (√दा+यत्, १.१) | to be given |
| प्रतिवाचिकम् | प्रतिवाचिक (१.१) | a reply |
| न | न | not |
| ते | युष्मद् (४.१) | to you |
| स्वनाम | स्वनामन् (२.१) | your own name |
| मत्कर्णसुधाम् | मद्–कर्ण–सुधा (२.१) | nectar for my ears |
| अकुर्वते | अकुर्वत् (√कृ+शतृ, ४.१) | who do not make |
| परेण | पर (३.१) | with another |
| पुंसा | पुंस् (३.१) | man |
| हि | हि | Indeed |
| मम | अस्मद् (६.१) | my |
| अपि | अपि | even |
| संकथा | संकथा (१.१) | conversation |
| कुलाबलाचारसहासनासहा | कुल–अबला–आचार–सह–आसन–असहा (१.१) | is as intolerable as sharing a seat according to the customs of women from noble families |
छन्दः
वंशस्थम् [१२: जतजर]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| म | या | पि | दे | यं | प्र | ति | वा | चि | कं | न | ते |
| स्व | ना | म | म | त्क | र्ण | सु | धा | म | कु | र्व | ते |
| प | रे | ण | पुं | सा | हि | म | मा | पि | सं | क | था |
| कु | ला | ब | ला | चा | र | स | हा | स | ना | स | हा |
| ज | त | ज | र | ||||||||
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.